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पुण्य कमाने के लिए 3 अगस्त को करें ये काम, देवी-देवताओं के आशीर्वाद से नहीं होगा जीवनभर कोई दुःख!

सावन महिना हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र महीने के रूप में माना जाता है। इस महीने की शुक्ल पक्ष की पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एवं पापनाशिनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस बार यह व्रत 3 अगस्त को पड़ रहा है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को करता है उसे पुत्र की प्राप्ति होती है, साथ ही उसके जीवन के सभी पापों का नाश हो जाता है। भगवान श्री श्री राधा गोविन्द की झूलन यात्रा भी इसी एकादशी से शुरू होती है।

विशेष रूप से पूजन करने पर होते हैं भगवान प्रसन्न:

यह यात्रा एकादशी यानी 3 अगस्त से शुरू होकर पूर्णिमा 7 अगस्त तक चलेगी, इस वजह से इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों में इस दिन के बारे में काफी कुछ बताया गया है। इस दिन विशेष रूप से भगवान का पूजन करने पर भगवान काफी प्रसन्न होते हैं। अगर भगवान प्रसन्न हो जाते हैं तो व्यक्ति के जीवन से कष्टों का हमेशा के लिए अंत हो जाता है और उसके सभी पाप भी ख़त्म हो जाते हैं।

ऐसे करें एकादशी की पूजा:

इस दिन प्रातःकाल जागने के बाद सभी नित्य क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद तुलसी दल और तुलसी मंजरियों के साथ धूप, दीप, नैवेद्य, फल-फूल से भगवान श्री केशव जी की पूजा करें। पूजा संपन्न होने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर विदा करें और हरिनाम का कीर्तन करें। एक समय फलाहार करने से व्रत संपन्न होता है। इस दिन सुबह-शाम को तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

अधिक पुण्य पाने के लिए इस दिन गाय को खिलाएँ चारा:

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अगले दिन यानी द्वादशी के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद पूजा-पाठ करके ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद स्वयं भी भोजन ग्रहण करें। इस दिन गाय को चारा खिलाएँ। यह व्रत वृहस्पतिवार को पड़ रहा है, इसलिए पीले रंग का वस्त्र धारण करें। ऐसा माना जाता है कि सभी एकादशी के व्रत से मनुष्य की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। लेकिन यह एकादशी ख़ास होती है। इसके व्रत से व्यक्ति के कई जन्मों के पाप एक साथ कट जाते हैं।

भक्ति के 64 अंगों में से एकादशी है प्रमुख अंग:

यह भी कहा जाता है कि इस व्रत के समय जो भगवान श्री कृष्ण के सामने दीपक जलाता है तो उसके पितर का स्वर्ग लोग में रहकर अमृत का पान करते हैं। दिन-रात दीपक दान करने से व्यक्ति को असंख्य पुण्यों की प्राप्ति होती है। विद्वान अमित चड्ढा के अनुसार भक्ति के 64 अंग होते हैं। इनमें एकादशी भी भक्ति का एक प्रमुख अंग है। इसलिए हिन्दू धर्म का पालन करने वाले सभी लोगों को एकादशी का व्रत करना चाहिए।

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