अध्यात्म

महाशिवरात्रि की रात कर लें बस ये छोटा सा काम, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट

हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2022) का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष ये पर्व 1 मार्च, मंगलवार को आ रहा है। महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है। इस दिन हर कोई (Lord Shiva) को प्रसन्न करने की कोशिश करता है। शिवजी का अभिषेक करने से लेकर विशेष पूजा और व्रत जैसी चीजें की जाती हैं।

महाशिवरात्रि पर होते हैं तंत्र मंत्र के उपाय

कहते हैं कि महाशिवरात्रि पर यदि कोई उपाय किया जाए तो उसका फल जल्दी मिलता है। धर्म ग्रंथों की माने तो भगवान शिव सभी ग्रहों और तंत्र-मंत्र व ज्योतिष के जनक हैं। इसलिए महाशिवरात्रि पर तंत्र-मंत्र एवं ज्योतिष से जुड़े उपाय करने से लाभ जरूर मिलता है। यदि आपके जीवन में कोई दुख या समस्या है तो इसका कारण आपकी कुंडली में मौजूद ग्रह दोष है।

आधी रात को ये उपाय करने से दूर होगी समस्या

यदि आप अपनी कुंडली के ग्रह दोषों से मुक्ति चाहते हैं तो महाशिवरात्रि की रात एक खास उपाय जरूर करें। इस उपाय के तहत आपको शिव पूजन और नवग्रह पूजन करना होगा। इसके लिए आपको महाशिवरात्रि के दिन नवग्रह कवच का 21 बार पाठ करना होगा। इससे नवग्रहों को प्रसन्न कर ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।

महाशिवरात्रि की आधी रात को भगवान शिव के सामने आसान बिछा बैठ जाए। इस दौरान पीले, नारंगी या लाल रंग के वस्त्र ही पहने। आप जहां पाठ कर रहे हैं वह जगह साफ सुथरी होना चाहिए। इस पाठ को करने से पूर्व स्नान जरूर करें। वहीं कपड़े भी साफ सुथरे ही पहनें। अब पूर्ण श्रद्धा भाव से नवग्रह कवच मंत्र का जाप करें। इस मंत्र को जपने से नवग्रहों की कृपा प्राप्त होगी और आपकी ग्रह दोष की पीड़ा समाप्त होगी।

नवग्रह कवच पाठ

ऊं शिरो मे पातु मार्तण्ड: कपालं रोहिणीपति:।
मुखमंगारक: पातु कण्ठं च शशिनंदन:।।
बुद्धिं जीव: सदा पातु हृदयं भृगुनंदन:।
जठरं च शनि: पातु जिह्वां मे दितिनंदन:।।
पादौ केतु सदा पातु वारा: सर्वागमेव च।
तिथयौष्टौ दिश: पातु नक्षत्राणि वपु: सदा।।
अंसौ राशि सदा पातु योग्श्च स्थैर्यमेव च।
सुचिरायु: सुखी पुत्री युद्धे च विजयी भवेत्।।
रोगात्प्रमुच्यते रोगी बन्धो मुच्येत बन्धनात्।
श्रियं च लभते नित्यं रिष्टिस्तस्य न जायते।।
पठनात् कवचस्यास्य सर्वपापात् प्रमुच्यते।
मृतवत्सा च या नारी काकवन्ध्या च या भवेत्।।
जीववत्सा पुत्रवती भवत्येव न संशय:।
एतां रक्षां पठेद् यस्तु अंग स्पृष्टवापि वा पठेत् ।।
।। इति श्री नवग्रह कवचं संपूर्णम् ।।

आशा करते हैं कि आपको ये उपाय पसंद आया होगा। यदि आपके किसी जान पहचान के बंदे की लाइफ में भी दुख या ग्रह दोष है तो उसके साथ इस उपाय को जरूर शेयर करें।

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