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डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी बरसी आज, जानिए उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें..!

आज हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी बरसी है। प्रधानमंत्री मोदी आज रामेश्वरम में मौजूद रहेंगे और अब्दुल कलाम स्मारक का उद्घाटन करेंगे। उनका निधन 27 जुलाई 2015 को शिलांग में हुआ था। उनके निधन की खबर सुनकर पूरे भारत को दुख हुआ था। अब्दुल कलाम एक नेक दिल इंसान होने के साथ-साथ एक बहुत अच्छे वैज्ञानिक भी थे। उन्होंने देश को अग्नि जैसी घातक और काफी दूर तक मार करने वाली मिसाइलें दी हैं। जिनसे दुश्मन देश कांपते हैं। अब्दुल कलाम जी 2002-07 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। उन्होंने आधुनिक भारत बनाने में अपना योगदान दिया था। जिसकी वजह से पूरा देश आज भी उन्हें याद करता है।

एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय :

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को धनुषकोडी गांव, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था। वे एक मध्यम वर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। कलाम जी को अपनी शिक्षा के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था। वे घर घर अखबार बाटने का काम करते थे और इस से कमाए गए पैसों से अपने स्कूल की फीस भरते थे। वह चार भाई बहन थे। उनकी मां असिंमा ईश्वर में श्रद्धा रखने वाली औरत थी।अब्दुल कलाम जी की प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम एलेमेंट्री स्कूल से हुई थी। बचपन में उनका सपना फाइटर पायलेट बनने का था, लेकिन समय के साथ ये सपना बदल गया। और एक साधारण से घर में जन्मा यह बच्चा सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत का राष्ट्रपति बना।

कैसे बने मिसाइल मैन :

डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम को पूरे भारत में मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। देहरादून एयरफोर्स अकादमी में कुछ नंबर कम मिलने की वजह से वो पायलेट तो नहीं बन पायें। लेकिन देश को अग्नि जैसी मिसाइल देकर मिसाइल मैन जरुर बनें। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा विभाग के लिए अतुलनीय योगदान दिया। कलाम जी की वजह से ही भारत बैलेस्टिक मिसाइल और लॉन्चिंग टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना। 1982 में कलाम को डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री का डायरेक्टर बनाया गया। उन्होंने भारत के लिए पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग, ब्रह्मोस समेत कई मिसाइल बनाई। वो कलाम ही थे जिनके डायरेक्शन में देश को पहली स्वदेशी मिसाइल मिली। यही कारण है कि आज भारत को ताकतवर देशों में गिना जाता है।

राष्ट्रपति बनने का सफर :

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का राष्ट्रपति बनने का सफर भी शानदार रहा। 1992 में अब्दुल कलाम जी रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा विकास विभाग के सचिव बन गए। वे इस पद में 1999 तक कार्यरत रहे। उनका नाम भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों की सूची में गिना जाने लगा। सन 2002 में कलाम जी को एनडीए घटक दलों ने राष्ट्रपति के चुनाव के समय अपना उम्मीदवार बनाया। जिसका सब ने समर्थन किया और 18 जुलाई 2002 को एपीजे अब्दुल कलाम जी ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। कलाम जी ने बहुत सी किताबें भी लिखी। जिसमें विंग्स ऑफ फायर, मिशन इंडिया, इंडिया 20-20 प्रमुख है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी को भारत सरकार द्वारा देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया।

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