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किसी ने भाई से अदावत की, कहीं मां ने बेटे को हाथी से कुचलवाना चाहा: सियासत ने तोड़ दिए कई परिवार

जबसे मानव सभ्यता है लगभग तभी से किसी ना किसी रूप में वर्चस्व या सत्ता प्राप्त करने की लड़ाई जारी है। सत्ता की इस लड़ाई में आरम्भ से ही पारिवारिक लोग भी आपस में लड़ते रहे हैं। इस बात के उदाहरण प्राचीन काल से ही मिलते हैं। प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास सत्ता के लिए पिता, भाई या बेटे की हत्या करा देने के उदाहरणों से भरे पड़े हैं।

आधुनिक काल में भी सत्ता के लिए पारिवारिक जंग किसी ना किसी रूप में दिखाई देती रहती है। स्वतंत्रता के बाद भारत की लोकतंत्रात्मक राजनीति जो दलीय व्यवस्था पर आधारित है उसमें भी सत्ता के संघर्ष ने कई परिवारों को बिखेर दिया है। इसीलिए कहा जाता है कि राजनीति जो ना करा दे। आज हम भारतीय राजनीति से जुड़े कुछ परिवारों के बारे में बताएंगे जहां इस सियासत ने एक ही परिवार के लोगों को दो अलग-अलग पाले में खड़ा कर दिया।

अपर्णा यादव ने अपने जेठ अखिलेश की पार्टी छोड़ दी

सबसे ताजा उदाहरण यूपी में मुलायम सिंह परिवार की छोटी बहू का पाला बदलना है। यूपी चुनाव से ठीक पहले, मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने बीजेपी का दामन थाम लिया। जेठ अखिलेश यादव के नेतृत्‍व में समाजवादी पार्टी का तरीका अपर्णा को पसंद नहीं आया।

यूपी चुनाव ने पिता-पुत्री को आमने-सामने कर दिया

उत्‍तर प्रदेश के इसी चुनाव में ही एक पिता-पुत्री भी अलग मंच पर आ खड़े हुए। यूपी की राजनीति में पिछले दिनों तब भूचाल आया जब कैबिनेट मंत्री स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने इस्‍तीफा दे दिया। कुछ दिन बाद वह सपा में शामिल हो गए। हालांकि उनकी बेटी संघमित्रा जो कि लोकसभा सांसद भी हैं, ने कहा कि वे बीजेपी की ‘निष्‍ठावान’ कार्यकर्ता हैं।

चन्नी के भाई ने उनसे किया किनारा

पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सीएम उम्‍मीदवार चरणजीत सिंह चन्‍नी को उनके भाई का साथ नहीं मिला है। चन्नी के भाई मनोहर सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

बाजवा भाइयों में अदावत

कांग्रेस के राज्‍यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई फतेह जंग सिंह पिछले साल दिसंबर में भाजपाई हो गए। दोनों की लड़ाई खुलकर सामने चुकी है। कादियां सीट से प्रताप सिंह कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि पड़ोसी बटाला सीट से फतेह जंग।

आदर्श शास्त्री ने जब तोड़ी पारिवारिक परंपरा

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री के पोते, आदर्श शास्‍त्री ने 2013 में ऐप्‍पल की नौकरी छोड़ आम आदमी पार्टी जॉइन की थी। कांग्रेसी परिवार से आने वाले आदर्श का यह फैसला घरवालों को बड़ा नागवार गुजरा। पिता ने तो पुश्‍तैनी घर से आदर्श को बाहर निकाल दिया था। उनका मजाक उड़ाया जाता था। इसी साल जनवरी में आदर्श वापस कांग्रेस में आ गए। अब वह फिर परिवार संग रहने लगे हैं।

मेनका गांधी ने सास इंदिरा गांधी का साथ छोड़ा

मशहूर खानदानों के बिखरने का सबसे बड़ा वाकया है नेहरू-गांधी परिवार का। सास इंदिरा गांधी से अनबन के चलते संजय गांधी की विधवा मेनका गांधी ने कांग्रेस तो छोड़ी ही, घर भी त्‍याग दिया। वह तल्‍खी आज तक बरकरार है।

सिंधिया परिवार में मां-बेटे में नहीं बनी

माधवराव सिंधिया और राजमाता विजय राजे सिंधिया के बीच बाद के दिनों में बेहद कड़वाहट रही। अपनी किताब ‘The House of Scindias: A Saga of Power, Politics and Intrigue’ में रशीद‍ किदवई लिखते हैं कि एक इंटरव्‍यू में माधवराव ने कहा था, ‘एक बार उन्‍होंने (मां) कहा कि मुझे हाथी के पैरों तले कुचलवा देना चाहिए था।’

दो पीढ़ियों तक बनी रही दरार

मां-बेटे की दरार अगली पीढ़ी तक भी पहुची। 2001 से 2020 के बीच बुआ यशोधरा राजे और ज्‍योतिरोदित्‍य के बीच सिंधिया की राजनीतिक विरासत को लेकर तनातनी रही। अब ज्‍योतिरादित्‍य बीजेपी में हैं मगर उनके बीच की तल्‍खी बरकरार है।

अलग-अलग पार्टी में जीजा-साले

पूर्व राज्‍यसभा सांसद और कांग्रेस नेता राजीव शुक्‍ला की शादी बीजेपी के रविशंकर प्रसाद की बहन से हुई है। शुक्‍ला कहते हैं कि वह अपना राजनीतिक और निजी जीवन अलग रखने में कामयाब रहे हैं।

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