अध्यात्म

आज ही कमायें इन चीजों को, जिन्हें यमदूतों से बचने के लिए यमलोक की यात्रा के समय बेचनी पड़ती हैं!

हिन्दू धर्म में कई ऐसी बातें बताई गयी हैं, जो की व्यक्ति के जीवन को बदल देती हैं। हिन्दू धर्म के अनुसार व्यक्ति को अपने जीवन में किये गए कर्मो के हिसाब से स्वर्ग और नर्क की प्राप्ति होती है। स्वर्ग केवल उसी व्यक्ति को मिलता है, जिसनें जीवन में हमेशा अच्छाई का रास्ता अपनाया होता है और अच्छे कर्म करता है। जबकि इसके उलट नर्क उन लोगों को मिलता है, जो जीवन में बुरे कर्म करते हैं।

यमलोक तक जाने का रास्ता है अत्यंत ही भयानक:

नर्क के बारे में कहा जाता है कि यह अत्यंत ही पीड़ा वाली जगह होती है। यहाँ पर जाने वाले व्यक्ति को कई पीड़ा भोगनी पड़ती है। उसके कर्मों के हिसाब से उसे नर्क में सजा भी दी जाती है। गरुण पुराण के अनुसार यमलोक तक जाने वाला रास्ता भयानक और पीड़ादायक है। उस जगह पर एक नदी बहती है जिसकी लम्बाई सौ योजन अर्थात 120 किलोमीटर है। गरुण पूरण के अनुसार इस नदी में जल के साथ-साथ खून, मवाद और हड्डियाँ भरी हुई हैं।

इस नदी में खूंखार मगरमच्छ, सुई के सामान मुख वाले कृमि, मछली और भयानक चोंच वाले गिद्ध भी रहते हैं। यम के दूत किसी व्यक्ति को मरने के बाद इस नदी के पास लाकर छोड़ देते हैं। उसके बाद नदी से भयानक गर्जन सुनाई पड़ती है। नदी में रक्त और मवाद का तूफ़ान आ जाता है। पापी व्यक्ति यह देखकर ही डर जाता है। इस नदी को केवल एक नाव द्वारा पार किया जा सकता है। उस नाव को चलाने वाला एक प्रेत होता है।

वह पिंड से बने शरीर में बसी हुई आत्मा से प्रश्न करता है कि तुम किस पुण्य के बल पर नदी पार करना चाहते हो। जो व्यक्ति अपने जीवन में गौदान किया होता है, वही इस नदी को पार कर सकता है। जबकि अन्य लोगों के नाम में काँटा फँसाकर नदी के ऊपर से खीचते हुए यमदूत ले जाते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों में कुछ ऐसे व्रत और उपवास के बारे में बताया गया है, जिनको करने वाले व्यक्ति को गोदान के सामान फल मिलता है।

दान करके कमाया जाता है पुण्य:

पुरानों के अनुसार दान वितरण है। इस नदी का नाम वैतरणी नदी है। इसका अर्थ है कि दान करके जो पुण्य कमाया जाता है, केवल उसी के बल पर इस नदी को पार किया जा सकता है। वैतरणी नदी की यात्रा को कष्टरहित बनाने के लिए मरने वाले व्यक्ति के नाम वैतरणी गोदान का विशेष महत्व है। इसमें मरते समय व्यक्ति के हाथ में गौ माता की पूंछ को हाथ में पकडाया जाता है या हाथ में स्पर्श करवाया जाता है। अगर ऐसा नहीं कर पाए तो गाय का ध्यान करवाकर इस मन्त्र द्वारा प्रार्थना करवाई जा सकती है।

वैतरणी गोदान मंत्र:

‘धेनुके त्वं प्रतीक्षास्व यमद्वार महापथे।
उतितीर्षुरहं भद्रे वैतरणयै नमौऽस्तुते।।
पिण्डदान कृत्वा यथा संभमं गोदान कुर्यात।’

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