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लेफ्टिनेंट बनी कुलगाम हमले में शहीद दीपक नैनवाल की पत्नी ज्योति, बेटी बोली- मां पर गर्व है

एक महिला जब कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई नहीं रोक सकता है। यह बात जम्मू-कश्मीर के कुलगाम हमले में शहीद हुए नायक दीपक नैनवाल की पत्नी ज्योति नैनवाल ने साबित कर दी है। ज्योति भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। वह चेन्नई में ओटीए से पास आउट हो गई हैं। उन्होंने पासिंग आउट परेड की जिसके बाद वह सेना में लेफ्टिनेंट बन गई हैं। उनके सम्मान में एक पासिंग आउट समारोह भी हुआ जिसमें लेफ्टिनेंट ज्योति नैनवाल सहित उनके के दो मासूम बच्चे भी शामिल हुए। दिलचस्प बात ये थी कि ज्योति के दोनों बच्चे सेना की वर्दी पहनकर आए थे।

कभी सोचा नहीं था नौकरी कर सकूंगी

jyoti nainwal

लेफ्टिनेंट बनने के बाद ज्योति ने अपनी इस उपलब्धि के लिए परिजनों और महार रेजिमेंट को शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि “मैंने कभी सोच नहीं था कि मैं जॉब कर सकूंगी। मैं हमेशा से एक हाउस वाइफ रही थी, हालांकि जब मेरे हसबैंड हॉस्पिटल में एडमिट थे तब मेरी समझ में आया कि सेना अपने सैनिकों की देखरेख कितनी सुंदरता से करती है। बस तभी मैंने सेना में शामिल होने की ठान ली। इस काम में रेजिमेंट ने भी मेरी बहुत हेल्प की।

ऐसे जिओ कि बच्चे हमसे प्रेरणा ले

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इस दौरान ज्योति ने कहा कि “मैं देश की वीर नारी से यह कहना चाहती हूं, कि अपनी जिंदगी को इस तरह से जिओ कि हमारे बच्चों को हमारे अलावा किसी और से प्रेरणा लेने की जरूरत ही न पड़े।” ज्योति की यह बाते सुन वहां मौजूद सभी लोग बड़े खुश हुए। उन्होंने तालियों की ध्वनि से ज्योति के विचार की तारीफ की।

बच्चों को है मां पर गर्व

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शहीद दीपक नैनवाला और उनकी पत्नी ज्योति के दो बच्चे हैं। बेटी का नाम लावण्या है जबकि बेटे का नाम रेयांश है। लावण्या चौथी क्लास में पढ़ रही है, जबकि रेयांश अभी पहली क्लास में ही है। अपनी माँ की उपलब्धि पर बेटी लावण्या नैनवाल ने कहा कि उन्हें अपनी मां पर गर्व है। एक दिन वह भी आर्मी ऑफिसर बनेंगी। उन्होंने साथ ही महार रेजीमेंट को शुक्रिया भी कहा।

लावण्या ने बताया कि महार रेजीमेंट की बदौलत ही मेरी मां एक आर्मी ऑफिसर बन पाई हैं। अंत में लावण्या ने कहा कि मैं एक बहुत ही प्राउड बेटी हूं। मुझे अपनी मां पर बहुत गर्व हो रहा है। वहीं दूसरी ओर बेटे रेयांश ने बताया कि उसका सपना भी फौज में अफसर बनने का है।

बताते चलें कि नायक दीपक नैनवाल देहरादून के हर्रावाला के रहने वाले थे। 10 अप्रैल 2018 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुई आतंकी मुठभेड़ में वह घायल हो गए थे। उनके शरीर में तीन गोलियां लगीं थी। वह अस्पताल में करीब एक महीने तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ते रहे। फिर 20 मई 2018 को वह शहीद हो गए।

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