ये क्या !! भगवान नहीं चाहते कि इस गाँव में कभी शौचालय बनें

इनमें से लगभग 808 परिवार आज भी खुले में शौच के लिए जाते हैं। जिन 73 परिवारों ने घरों में शौचालय बनाए थे, उनमें से भी 30 परिवारों ने उन्हें तोड़ डाला। जबकि, 20 परिवारों ने शौचालयों पर ताला डाला हुआ है। कुल मिलाकर  23 परिवार ही शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं। इसको देखते हुए ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि शौचालय बनवाने के लिए गाँव वालों के प्रेरित नहीं किया गया हैऐसा नहीं कि शौचालय बनाने के लिए इन ग्रामीणों को प्रेरित नहीं किया गया। जिला परियोजना प्रबंधन इकाई स्वजल ने तो अप्रैल

ग्रामीण से पूछे जाने पर बताते हैं कि 15 साल पहले गांवों में कुछ लोगों जिस दिन शौचालय बनवाए थे उस दिन के कुछ दिन के बाद से गांव में अतिवृष्टि होने से खेत व फसल तबाह हो गई। जिसके बाद ग्रामीण देवता के पास गए और देवता ने अतिवृष्टि और गांव में होने वाले नुकसान का कारण वहां बने शौचालयों को बताया।

तराकोट की प्रधान उर्मिला देवी का कहना है कि उनके गांव में लगभग 103 परिवार हैं, लेकिन शौचालय केवल तीन के ही पास है, जो उनका उपयोग भी कर रहे हैं। गांव के अन्य लोग अंधविश्वास के नाम शौचालय नहीं बनवा रहें हैं

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