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महाराष्ट्र में भी किसान आन्दोलन हुआ हिंसक, आन्दोलनकारियों ने पुलिस की 6 गाडियों में लगा दी आग!

बदलापुर: पूरे देश में किसान आन्दोलन की आग फैलती ही जा रही है। शुरुआत में किसानों का आन्दोलन शांतिपूर्ण होता था। लेकिन सरकार के सुनवाई नहीं करने की वजह से यह आन्दोलन भयावह रूप लेता गया। कई जगहों पर किसानों पर जमकर लाठियां भी बरसाई गयी हैं। मध्यप्रदेश में पुलिस की गोली से कई किसानों की मौत भी हो गयी। इसके साथ ही किसान आन्दोलन देश के अन्य हिस्सों में भी फैला चुका है। former protest.

किसान आन्दोलन देश के सभी हिस्सों में बढ़ रहा है :

धीरे-धीरे किसान आन्दोलन देश के सभी हिस्सों में हिंसा की तरफ बढ़ रहा है। आये दिन किसान आन्दोलन में छोटी बड़ी कोई ना कोई हिंसा देखी जा सकती है। महाराष्ट्र के कल्याण में नेवली एयरपोर्ट के लिए सरकार द्वारा ली गयी जमीन को वापस करने के लिए किसान आन्दोलन कर रहे थे। आन्दोलन गुरुवार को हिंसक हो गया। किसानों की हिंसा का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियों में आन्दोलनकारियों ने आग लगा दी।

पुलिस को भी सामना करना पड़ा किसानों के गुस्से का:

मौके पर पहुंची पुलिस को भी किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद कल्याण से हाजी मलंग जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया गया है। घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। आपको बता दें कि कुछ साल पहले सरकार ने यहां के किसानों से एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन ली थी। बाद में उस जगह पर सेना के कैम्प बनाने का काम शुरू कर दिया गया। बताया जा रहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के समय यह जमीन अंग्रेजों के कब्जे में थी।

सेना पुनः चाहती है जमीन पर अपना कब्जा:

जब यह देश आजाद हुआ तो आस-पास के किसानों ने इस जमीन पर अपना कब्जा जमा लिया। सेना पुनः इस जमीन पर अपना अधिकार चाहती है। जबकि वहां के किसानों का कहना है कि उनकी जमीन हवाई अड्डा बनाने के लिए ली गयी थी, इसलिए यहां हवाई अड्डा ही बनना चाहिए। किसान पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन अचानक गुरुवार को इस आन्दोलन ने हिंसक रूप ले लिया।

किसानों के बिजली बिलों को भी किया जायेगा माफ:

किसानों का यह आन्दोलन 1 जून को अहमदनगर के पुणतांबा से शुरू हुआ था। इस आन्दोलन में फसल, सब्जियों और दूध की काफी बर्बादी की गयी। राज्य में जरूरी चीजों की कमी होने लगी थी। शिवसेना ने भी किसानों का पक्ष लेते हुए समर्थन वापस लेने का इशारा दिया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फड़णवीस ने 2 जून को 31 अक्टूबर तक कर्जमाफी पर फैसला लेने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने यह भी कहा था कि किसानों के बिजली बिलों को भी माफ कर दिया जायेगा।

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