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कोल इंडिया ने दिखाया दम, Coal Crisis के बीच हर रोज होने लगी 270 रैक कोयले की आपूर्ति

जल्द टल जाएगा ब्लैकआउट का खतरा, कोल इंडिया ने दिखाया दम, जानिए क्या है पूरी कहानी...

बिजली संकट से उबरने के लिए कोल इंडिया द्वारा कोयला की आपूर्ति लगातार बढ़ाई जा रही है। लगातार रैक बढ़ रहे है। बुधवार की सुबह तक कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी बीसीसीएल ने कोयला आपूर्ति का लक्ष्य हासिल कर लिया। वैसे, कोल इंडिया ने पावर सेक्टर को 310 रैक कोयला की आपूर्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। अभी 279 रैक भेजा जा रहा है। पूर्व के मुकाबले यह 30 से 35 रैक अधिक है।

आपूर्ति का आंकड़ा लक्ष्य के 90 फीसद तक पहुंच गया है। एक रैक में करीब चार हजार टन कोयला लोड होता है। गुलाब चक्रवात के कारण कोल इंडिया की अधिकतर खुली खदानों में पानी भर गया था। इससे उत्पादन पर असर पड़ा, हालांकि कोयले का भंडार पर्याप्त था। इसी बीच पावर सेक्टर में कोयला की कमी की बात सामने आई।

बिजली कंपनियों की सप्लाई सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश… 

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कोल इंडिया ने सभी सहयोगी कंपनियों को संदेश दिया कि बिजली कंपनियों को कोयला की कमी होने नहीं दी जाय। रेल मंत्रालय ने भी संज्ञान लिया। कोल इंडिया की मांग के मुताबिक रैक देने का निर्देश दिया गया। कोयला कंपनियों ने लगातार आपूर्ति बढ़ा दी है, बावजूद अभी भी कोल इंडिया के पास 39.13 हजार टन कोयले का भंडार मौजूद है। इधर, खदानों से पानी निकालने का काम भी तेज कर दिया गया है। आने वाले समय में उत्पादन में तेजी आने की संभावना है।

लक्ष्य के तहत भेजा गया रैक…

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1) कंपनी रैक सप्लाई लक्ष्य किया गया

2) ईस्टर्न कोलफील्ड लि.(ईसीएल) 21 16

3) भारत कोकिंग कोल लि (बीसीसीएल) 24 24

4) सेंट्रल कोलफील्ड लि.(सीसीएल) 46 40

5 नादर्न कोलफील्ड लि.(एनसीएल) 35 33

6) वेस्टर्न कोलफील्ड लि.(डब्ल्यूसीएल) 32 26

7) साउथ ईस्ट कोलफील्ड लि.(एसईसीएल) 50 47

8) महानदी कोलफील्ड लि.(एमसीएल) 102 93

महत्वपूर्ण तथ्य, जो हमें समझना चाहिए…

1) बता दें कि कोल इंडिया ने 19.20 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। अभी 16.02 लाख टन कोयला का उत्पादन हो रहा है।

2) कोल इंडिया ने 19.80 लाख कोयला के डिस्पैच का लक्ष्य निर्धारित किया है। 18.82 लाख टन कोयला भेजा रहा है।

कोयले के लिए रेलवे ने बनाया स्पेशल कारिडोर…

वहीं आख़िर में बता दें कि देश को बिजली संकट से बचाने के लिए रेलवे भी कोल इंडिया के साथ कदम में कदम मिलाकर काम कर रहा है। कोयला कंपनियों से बिजली कंपनियों तक निर्बाध कोयले की आपूर्ति के लिए रेलवे ने स्पेशल कारिडोर बनाया है। फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर कोयले से लदी मालगाड़ियों को पास दिया जा रहा है। कुल-मिलाकर देखें तो सरकार इस क़वायद में लगी हुई है कि जल्द से जल्द कोयला की समस्या से निजात मिल सकें।

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