नई दिल्ली: कुलभूषण जाधव केस के बारे में तो देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि कैसे पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाते हुए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को बिना सुनवाई के ही फांसी की सजा सुना दी। जैसे ही यह बात भारत सरकार को पता चली, भारत सरकार ने कुलभूषण की रिहाई के लिए अपनी जी-जान लगा दिया। पहले पाकिस्तान सरकार से इस बारे में बात की गयी।

अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने भारत के पक्ष में सुनाया फैसला:

पाकिस्तान सरकार ने कुछ भी मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद भारत के पास एक ही रास्ता बचा था, इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में ले जाने का। भारत सरकार ने ऐसा ही किया। इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाया गया। वहां फैसला भारत के पक्ष में हुआ। लेकिन पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया।

अब भारत की बारी है। पाकिस्तान के उस दावे को भारत ने एक सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें पाकिस्तान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कुलभूषण जाधव वाले मामले में होने वाली कार्रवाई को दिसंबर तक टालने के भारत के अनुरोध को खारिज कर दिया है। पत्रकारों को जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि यह स्थिति तथ्यात्मक तौर पर गलत है।

भारत ने की तेजी से सुनवाई की मांग:

उन्होंने कहा कि 8 जून को अंतरराष्ट्रीय अदालत के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने भारत को इस मामले में सम्बंधित दस्तावेज न्यायलय में 13 सितम्बर तक जमा कराने को कहा है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को भी इससे जुड़े जवाबी दस्तावेज 13 सितम्बर तक जमा करने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद ही न्यायालय के अध्यक्ष अगली सुनवाई की तारीख तय करेंगे। भारत ने इस मामले में तेजी से सुनवाई करने का अनुरोध करते हुए दस्तावेज जमा करने के लिए 4 महीने का वक्त मांगा। भारत को यह वक्त मिल भी गया, भारत को दस्तावेज सितम्बर तक जमा करने हैं। कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं।

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