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GST के अंदर आ सकता है पेट्रोल-डीजल, पेट्रोल 75 रुपये तो डीजल मिल सकता है 68 रुपये प्रति लीटर

GST के अंदर आ सकता है पेट्रोल-डीजल, पूरे देश में होंगे समान दाम, राज्यों की मनमानी पर लगेगी रोक

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से हर कोई परेशान है। ऐसे में केंद्र सरकार अगले वर्ष देश के 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस पर एक बड़ा फैसला ले सकती है। खबरों की माने तो सरकार ‘एक देश -एक दाम’ के तहत पेट्रोल-डीजल, प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विमान ईंधन) को GST के दायरे में लाने का सोच रही है। इस पर विचार शुरू भी हो गया है। 17 सितंबर को लखनऊ में GST काउंसिल की बैठक होनी है, ऐसे में इस विषय पर यहां चर्चा हो सकती है।

Nirmala Sitharaman

बता दें कोरोना महामारी के बाद GST काउंसिल की यह पहली फिजिकल बैठक होगी। GST काउंसिल की यह 45वीं बैठक होगी जिसकी अध्यक्षता वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। इस बैठक में ‘एक देश-एक दाम’ के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। इस दौरान एक या एक से अधिक पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार विमर्श हो सकता है।

petrol diesel

यदि GST काउंसिल मंत्री समूह के इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देती है तो देश के सभी राज्यों में पेट्रोल और डीजल के एक दाम हो जाएंगे। ऐसा होने पर पेट्रोल व डीजल के दामों में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिल सकती है। लेकिन अंदर के सूत्रों की माने तो GST काउंसिल शायद ही इस प्रस्ताव का समर्थन करेगी। कुछ सूत्रों का दावा है कि GST काउंसिल के उच्च अधिकारी पेट्रोलियम पदार्थों पर एक समान GST लगाने को रेडी नहीं है। इसकी वजह राजस्व बताई जा रही है।

GST

दरअसल पेट्रोल व डीजल से सरकारों को सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 पर नाज़र दौड़ाएं तो पेट्रोलियम पदार्थों से राज्य व केंद्र सरकार को 5.55 लाख करोड़ का राजस्व मिला था। वर्तमान में केंद्र सरकार पेट्रोल पर 32% जबकि राज्य सरकार 23.07% टैक्स वसूल रही है। डीजल की बात करें तो इस पर केंद्र 35% तो राज्य सरकारें 14% से अधिक टैक्स ले रही हैं।

GST

इस बैठक में कोरोना उपचार से जुड़े उपकरणों व दवाइयों पर भी टैक्स के माध्यम से कुछ छूट दी जा सकती है। साथ ही 80 लाख से अधिक फर्म के लिए आधार अनिवार्य हो सकता है। वहीं GST काउंसिल द्वारा सिक्किम में फार्मा और बिजली पर स्पेशल सेस की इजाजत देने के लिए मंत्रियों के समूह (GoM) की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।

सिक्किम GoM को 3 वर्ष के लिए फार्मा आइटम्स की इंटर-स्टेट सप्लाई पर 1% उपकर (Cess) एवं बिजली की खपत या बिक्री पर 0.1 रुपए प्रति यूनिट लगाने की इजाजत देने के समर्थन में है। लेकिन ये राज्य का मेटर है जो कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के दायरे से बाहर आता है। GoM द्वारा केंद्र सरकार से विनती की गई है कि वह 2023 तक सिक्किम को मदद के रूप में 300 करोड़ रुपए प्रति वर्ष का विशेष पैकेज दें। इससे उन्हें COVID​​​-19 से हुए नुकसान की रिकवरी करने में हेल्प मिलेगी।

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