झूठी है स्वाति सिंह के पैसे बांटने की खबर, ‘सबसे तेज खबर’ के चक्कर में मीडिया ने फैलाई अफवाह!

उत्तर प्रदेश – कुछ ही दिन पहले बियर बार का उद्घाटन कर विवादों में फंसी योगी सरकार की मंत्री स्वाति सिंह फिर से उस वक्त चर्चा में आ गई जब खुद को ‘सबसे तेज’ बताने वाले कुछ मीडिया हाउस ने उनकी एक फोटो दिखाकर भंडारे में सभी को सौ-सौ रुपये बांटने की खबर दिखा दी। लगभग सभी न्यूज चैनल पर खबर दिखाई गई कि स्वाति सिंह ने भंडारे के दौरान प्रसाद के साथ 100-100 रुपये के नोट बांटे हैं। मीडिया ने तरह-तरह की खबरें दिखाकर स्वाति सिंह, बीजेपी और योगी सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। ‘सबसे तेज’ बनने की होड़ में किसी ने इस इस तस्वीर का सच जानने की कोशिश नहीं की। Swati singh distributed 100 rupees.

ये है इस वायरल खबर का सच :

इस तरह की खबर से परेशान होकर स्वाति सिंह ने खुद सफाई देते हुए कहा कि, भंडारे के दौरान उन्होंने केवल नौ कन्याओं को पैसे दिये हैं, जिन्हें प्रसाद ग्रहण कराया था। स्वाति सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि, उन्होंने बड़े मंगल के मौके पर आयोजित भंडारे में उन नौ कन्याओं को पैसे दिए, जिन्हें प्रसाद ग्रहण कराया था ना कि सभी लोगों को पैसे बांटे।

आपको बता दें कि कल ज्येष्ठ मास का आखिरी मंगलवार था, इसीलिए जगह-जगह पर इस तरह के भंडारों का आयोजन किया गया था। लखनऊ के गोमतीनगर में ऐसे ही किसी भंडारे का आयोजन स्वाति सिंह ने भी किया था। जहां उन्होंने 9 बच्चियों को पूड़ी-सब्जी के साथ सौ-सौ रुपये के नोट दिये, जिसको मीडिया ने गलत खबर के तौर पर पेश किया।

सच्चाई की जांच तो कर लेता मीडिया :

आपको बता दें कि इससे पहले भी स्वाति सिंह ने 20 मई को अपनी एक दोस्त के बियर बार का उद्घाटन किया था जिसपर मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने सफाई भी मांगी थी। स्वाति सिंह ने अपनी सफाई में कहा था कि ये रेस्त्रां मेरी देवरानी की सहेली का है, इसलिए मैंने इसका उद्घाटन किया। इन दोनों मामलों से ऐसा लगता है कि मीडिया विपक्षी पार्टियों की तरह काम करने लगा है।

मीडिया को कहीं से भी कोई अधूरी तस्वीर या खबर मिल जाए तो वे उसकी सत्यता की जांच किये बिना खबर चला देते हैं। ऐसी खबरों के लिए सोशल मीडिया ज्यादा जिम्मेदार है। सनातन परंपरा के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की प्रारंभ में ‘कन्या भोज’ कराना शुभ माना गया है। कन्या भोज के दौरान कन्याओं को दक्षिणा स्वरूप कुछ धन भी दान किया जाता है। स्वाति सिंह ने बस इसी परंपरा का पालन किया था। तो इसमें क्या गलत है?

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