हिन्दू धर्म को लेकर स्कूल की टेक्स्ट बुक्स में दी गयी नकारात्मक टिप्पणियों और जानकारियों के विरोध में कैलिफोर्निया में भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया. लोगों ने किताबों में कथित रूप से हिंदुत्व की बारे में नकारात्मक छवि पेश किये जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की.

आपको बता दें कि अमेरिका में हिन्दू एजुकेशन फाउंडेशन इस क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है, ताकि किताबों में दी जा रही गलत जानकारी को सुधारा जाये. इस मामले पर कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की तरफ से आयोजित एक सार्वजानिक सुनवाई के दौरान हिन्दू एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक शांताराम नेक्कर ने कहा कि अमेरिका में रह रहे हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा लम्बे समय से जागरूकता अभियान चलाये जाने के बाद भी स्कूली किताबों में भारतीय सभ्यता के सम्बन्ध में गलत, मिथकों से भरी और नकारात्मक जानकारी दी जा रही है, उन्होंने बताया कि यह जानकारी खासतौर से हगटन मिफलिन हारकोर्ट, मैकग्रॉ-हिल, डिस्कवरी और नैशनल जिऑग्रफिक से प्रकाशित स्कूली किताबों में दी जा रही है.

नेक्कर के कहा कि इन किताबों में भारतीय सभ्यता के बारे में ऑरीएंटलिस्ट नरेटिव का इस्तेमाल किया जाना निराशाजनक है, वहीँ दूसरी तरफ कैलिफोर्निया स्टेट के मुताबिक किताबें पूरी तरह से डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन के फ्रेमवर्क पर आधारित हैं. जिन्हें विद्वानों, छात्रों और समुदाय के लोगों से मिली जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है.

इसके अलावा इस मुद्दे पर काफी लम्बे समय से विवाद भी चल रहा है, ऐसे में बीते दिनों कुछ विवादों के चलते इन फ्रेमवर्क्स में बदलाव भी किये गए थे, इससे पहले अकादमिक और समूह किताबों में भारत की जगह पर साउथ एशिया लिखे जाने के प्रयास पर भी विवाद हुआ था. ऐसे में बीते दो सालों से कैलिफोर्निया स्टेट का डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन विद्वानों, छात्रों, और सामुदायिक लोगों से इनपुट लेकर संशोधन कर रहा है.

गौरतलब है कि जिन मुद्दों या संकल्पनों पर विवाद है उनमें योग, धर्म, महर्षि व्यास और बाल्मीकि शामिल हैं साथ ही विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र से जुडी भारतीय उपलब्धियों से जुड़े तमाम अपडेट भी शामिल हैं. जबकि स्थानीय हिदू समुदाय के लोग कहते हैं कि फ्रेमवर्क में बदलाव तो किये गए हैं लेकिन टेक्स्टबुक्स में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है.

एक स्थानीय स्कूल में पढने वाले एक छात्र के अभिभावक बताते हैं कि स्कूली किताबों के कुछ प्रकाशक पहले की ही तरह अभी भी हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगे हुए, ये प्रकाशक फ्रेमवर्क में किये गए बदलावों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मौजूदा फ्रेमवर्क हिन्दू सभ्यता को दूसरी अन्य सभ्यताओं की ही तरह सकारात्मक रूप से प्रस्तुत करने में मददगार है. उन्होंने यह भी कहा कि किताबों में हिन्दू धर्म की नकारात्मक छवि पेश किये जाने से क्लास में हिन्दू समुदाय के बच्चों के साथ गलत व्यवहार और अपमान किये जाने के कई मामले भी सामने आ चुके हैं.

वहीँ यह भी बताया जा रहा है कि विवादित बातों के साथ प्रकाशित किताबों को अगले साल फिर से शुरू होने वाले सत्र में लागू किए जाने की आशंका है.

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