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इस भारतीय नौजवान को अमेरिकी सेना में मिली बड़ी नौकरी, सैलरी है 1.2 करोड़ रूपये!

भारतीय युवा अपना परचम पूरी दुनिया में लहरा रहे हैं, एक तरफ तो ब्रेन ड्रेन जैसी समस्या है ही मगर दूसरी तरफ भारतीय अपनी काबिलियत से पूरी दुनिया के सामने अपनी मेहनत से देश का नाम और अपना सिर ऊंचा कर रहे हैं. पहले भी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत के नौजवानों और उनके काम की बहुत प्रशंसा की है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भारतीय मूल के नौजवान कर्मचारियों का बेहद पसंद भी करते थे.

भारतीय मूल के युवा ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया :

एक और भारतीय मूल के युवा ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया, इस नवयुवक को अमेरिका की सेना में एक बेहद अहम और शानदार पद पर नौकरी मिली है, इस युवक को अमेरिकी सेना में एएच-64 लड़ाकू हेलिकॉप्टर की यूनिट में बतौर वैज्ञानिक नियुक्त किया गया है, और इसके लिए इस युवक की सैलरी सालाना 1.2 करोड़ रूपये होगी. इस युवक का नाम मोनार्क शर्मा है.

मोनार्क शर्मा अमेरिका के टेक्सास के फोर्ट हूड स्थित वायुसेना मुख्यालय में अगले एक साल तक काम करेंगे. यहां उन्हें लड़ाकू विमानों के डिजाइनिंग से लेकर विमानों का निरीक्षण, निर्माण कार्य और उनकी दक्षता जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है. वे अमेरिका के लिए लड़ाकू विमानों के डिजाइन भी तय करेंगे.

मोनार्क शर्मा को शुरू से ही अंतरिक्ष विज्ञान और उपकरणों में रूचि थी :

आपको बता दें कि मोनार्क शर्मा पूरी तरह से भारतीय हैं यानी कि वह किसी एनआरआई के बेटे नहीं हैं, उनके पिता राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त निजी सचिव के पद पर कार्यरत हैं, शर्मा को शुरू से ही अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकि तथा रक्षा उपकरणों में रूचि थी. वे पिछले कुछ सालों से अमेरिका में काम कर रहे थे.

उन्होंने अपने वैज्ञानिक करियर की शुरुआत साल 2013 में अमेरिका की प्रतिष्ठित अतरिक्ष एजेंसी नासा से की. वे नासा के मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में जूनियर साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत थे. वहां लगभग तीन साल काम करने के बाद उन्होंने साल 2016 में अमेरिकी सेना जॉइन की. अमेरिकी सेना में तीन महीने में ही उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपनी काबिलियत साबित कर दी और उन्हें दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. मोनार्क को अमेरिकी सेना ने आर्मी सर्विस मेडल और सेफ्टी एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा है.

भले ही मोनार्क अमेरिकी सेना के लिए काम कर रहे हैं और अमेरिका की ताकत बढ़ा रहे हैं लेकिन उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि वह भारतीय सेना का हिस्सा नहीं बन सके फिर भी वह भारतीय सेना के लिए कुछ करना चाहते हैं. जिससे पूरे भारत को उनपर गर्व महसूस हो, मोनार्क का मानना है कि उनके काम से अमेरिका आने वाले भारतीय छात्र कठिन परिश्रम और मेहनत करने के लिए प्रेरित होंगे.

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