अध्यात्म

आमलकी एकादशी के दिन जरूर करें आंवला पेड़ का पूजन, पढ़ें इससे जुड़ी पौराणिक कथा..

आमलकी एकादशी व्रत इस साल 25 मार्च को आ रहा है। इस एकादशी को बेहद ही शुभ माना गया है और इस दौरान व्रत रखने से व विष्णु जी का पूजन करने से हर कार्य पूर्ण हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस एकाशी का व्रत तभी सफल होता है, जब इससे जुड़ी कथा सुनी जाती है। बिना कथा पढ़े ये व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है और व्रत रखने का लाभ भी नहीं मिलता है। इसलिए आप आमलकी एकादशी का व्रत रखने के साथ-साथ इस व्रत से जुड़ी कथा को भी जरूर पढ़ें।

आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व

इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा करने के साथ-साथ आंवला के पेड़ की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के पेड़ की पूजा करना शुभ होता है। कहा जाता है कि इस संसार की रचना के समय भगवान विष्णु ने आंवले को पेड़ के रूप में प्रतिष्ठित किया था। यहीं वजह है कि इस पेड़ पर भगवान विष्णु का वास माना गया है और आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं।

आमलकी एकादशी व्रत मुहूर्त

एकादशी तिथि का प्रारंभ – 24 मार्च को सुबह 10 बजकर 23 मिनट से हो जाएगा। जो कि  25 मार्च को 09 सुबह 47 मिनट तक का है। एकादशी व्रत पारण का समय – 26 मार्च को सुबह 06:18 बजे से 08:21 बजे तक। इस दौरान ही आप व्रत को तोड़ें।

आमलकी एकादशी व्रत विधि

  • एकादशी वाले दिन आप सुबह जल्दी उठें और घर को अच्छे से साफ कर लें। उसके बाद स्नान करें। फिर पूजा घर की सफाई कर लें और मंदिर में एक चौकी स्थापित कर दें।
  • इस चौकी पर पीले रंग का वस्त्र जरूर बिछाएं। इसपर विष्णु जी की मूर्ति रख दें। फिर विष्णु जी को फूल व फल अर्पित करें और भोग लगाएं।
  • चौकी पर एक दीपक जला दें और पूजा शुरू करते हुए सबसे पहले व्रत रखने का संकल्प लें। संकल्प लेने के बाद विष्णु से जुड़े मंत्रों का जाप करें और इस व्रत की कथा को जरूर पढ़ें। व्रत कथा इस प्रकार है

आमलकी एकादशी व्रत कथा

आमलकी एकादशी व्रत कथा के अनुसार एक चित्रसेन नामक राजा हुआ करता था। ये राजा एकादशी व्रत रखा करता था। राजा के साथ ही उसकी प्रजा के लोग भी ये व्रत किया करते थे और विष्णु जी का पूजन करते थे। एक बार राजा शिकार करने के लिए जंगल में जाते हैं और वो शिकार करते हुए जंगल में काफी अंदर चले जाते हैं। जंगल में राजा को डाकू मिलते हैं। जो कि उन्हें घेर लेते हैं। एक डाकू राजा पर प्रहार करता है। लेकिन जब भी डाकू राजा पर प्रहार करता शस्त्र फूल बन जाते। सभी डाकू बार-बार राजा पर प्रहार की कोशिश करते और बार -बार शस्त्र फूल बन जाते। वहीं इतने सारे डाकुओं को देख राजा डर के मारे बेहोश हो गए और संज्ञाहीन होकर भूमि पर गिर गए। तभी राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट होती है और उस दिव्य शक्ति ने समस्त डाकू मारे जाते हैं।

जब राजा को होश आता है, तो उन्हें अपने पास सारे डाकू मरे हुए दिखते हैं। ये सब देखकर राजा को आश्चर्य होता है और राजा इसी सोच में पड़ जाते हैं कि  आखिर किसने डाकुओं को मारा। तभी एक आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया है कि हे राजन! ये सब दुष्ट तुम्हारे आमलकी एकादशी का व्रत करने के प्रभाव से मारे गए हैं। तुम्हारी देह से उत्पन्न आमलकी एकादशी की वैष्णवी शक्ति ने इनका वध कर दिया।। इन्हें मारकर वो पुन: तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर गई। ये सारी बातें सुनकर राजा को व्रत का महत्व पता चला है। राजा ने इस व्रत को ओर अच्छे से करना शुरू कर दिया। साथ में ही अपने राज्य की प्रजा को भी ये व्रत हर हालात में करने को कहा। तभी से ये व्रत प्रचलित हो गया।

रखें इन बातों का ध्यान

  • इस दिन आप आंवला के पेड़ का पूजन जरूर करें। आंवला के अलावा पीपल के पेड़ की पूजा करना भी शुभ होता है।
  • एकादशी की शाम तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु को केले चढ़ाएं और गरीबों को भी केले बांट दें।
  • भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी का पूजन करें और गोमती चक्र और पीली कौड़ी भी पूजा में रखें।
  • तुलसी के पत्ते ना तोडे़।
  • घर में प्याज और चावल से बनीं हुई चीजे न बनें और न खाएं।

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