राजनीति

रवीजोत सिंह द्वारा : नरेंद्र मोदी की सुब्रमनियन स्वामी को फटकार के मायने!

कल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अरनब गोस्वामी के साक्षात्कार के बाद जो बात सबसे ज़्यादा सामने आ रही है वो है प्रधानमंत्री का सुब्रमण्यन स्वामी को घुड़की या फटकार यानी अंग्रेजी में कहा जाये तो snub or rebuke

अब जिन लोगों को यह लग रहा है की नरेंद्र मोदी का यह कहना की रघुराम राजन भी कोई कम देशभगत नहीं है, कोई भी अपने को system से बड़ा न समझे और इन पब्लिसिटी स्टंट्स से देश को कोई फायदा नहीं होगा, यह उनका स्वामी को घुडकना है तो मुझे उन लोगों की राजनितिक समझ पर हँसी आ रही है|

सबसे पहले तो हम यह समझें की इस इंटरव्यू के मायने क्या हैं|
अगर मैं गलत नहीं हूँ तो यह पहला ऐसा इंटरव्यू था जो देश के प्रधानमंत्री ने दिया किसी प्राइवेट न्यूज़ चैनल को प्रधानमंत्री रहते हुए| तो पुरे देश की ही नहीं पूरी दुनिया की निगाहें इस इंटरव्यू पर थी| ऊपर से यह इंटरव्यू लेने वाले का नाम है अरनब गोस्वामी, जो की मशहूर है अपनी बिंदास पत्रकारिता के लिए|

तो यह इंटरव्यू के मायने काफी खास थे क्योंकि इसमें कही गयी हर बात को बहुत ‘महीन’ तरीके से जांचा जायेगा यह तो तय था ही|

ऊपर से अरनब ने प्रश्न पूछा की प्रधामंत्री जी का क्या कहना है रघुराम राजन से जुड़े विवाद की बारे में?
अब प्रधानमंत्री जी इस बात पर क्या जवाब देते? क्या वो बोलते की हाँ जी स्वामी जी बिलकुल सही बोल रहे हैं की रघुराम राजन भारत के खिलाफ काम कर रहे थे! वो कांग्रेस के एजेंट थे जो भाजपा के खिलाफ काम कर रहे थे?

नरेंद्र मोदी की सुब्रमनियन स्वामी को फटकार के मायने!

अगर वो यह जवाब देते तो तो फिर पूरा मीडिया और विरोधी दल राशन पानी ले कर उन पर चढ़ जाते| और सबसे आगे होते अरविन्द केजरीवाल|

खैर!

तो प्रधानमंत्री जी ने वो ही जवाब दिया जो एक उनके स्तर का राजनेता (statesman) देता| उन्होंने न ही इस मौके को नज़ाकत से सम्भाला बल्कि मीडिया ने जो 2014 की गर्मियों में एक माहौल बनाया था की राजन को मोदी हटा देंगे उन्हें उस बारे में भी याद करा दिया की वह कितने गलत थे|

समझने वाली बात यह है की प्रधानमंत्री मोदी एक राजनेता के तौर पर हर दिन और भी परिपक्व होते जा रहे हैं|

अब जो लोग यह तर्क देंगे इस लेख को पड़ने के बाद की इसका मतलब तो प्रधानमंत्री दोगले साबित होते हैं| एक तरफ तो वह सुब्रमण्यन स्वामी को छूट देते हैं और दूसरी तरफ मीडिया में उनको घुडकतें है| उन लोगों को शायद डिप्लोमेसी क्या होती है उसकी पूरी समझ नहीं है|

परन्तु, हो तो यह भी सकता है की मेरा यह जो विश्लेषण है वो बिलकुल गलत हो और प्रधानमंत्री जी ने सही में ही स्वामी को एक कड़ा सन्देश दिया हो|
पर जो भी हो उन्होंने वो तीर मारा है तो गलत निशाने पर लग ही नहीं सकता|

यह है आपके और हमारे उत्कृष्ट (classic) नरेंद्र दामोदरदास मोदी, भारतवर्ष के वर्त्तमान प्रधानमंत्री!

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