फांसी की सजा पाने वाली शबनम ने अपने बेटे से कही ऐसी बात, जान कर आप भी हो जाएंगे भावुक

शबनम इस देश की प्रथम ऐसी महिला होने वाली है जिसे फांसी दी जाएगी। फांसी लगने से पहले शबनम ने अपने बेटे से जेल में मुलाकात की और इस मुलाकात के दौरान शबनम ने जो भी अपने बेट से कहा वो पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। बीते 21 फरवरी को शबनम से उसके बेटे ताज और उसके संरक्षक उस्‍मान ने मुलाकात की थी। इस दौरान शबनम ने पहले अपने बेटे को गोदी में लिया। फिर उसको टॉफी और कुछ रुपये भी दिए।

उस्मान सैफी ने इस मुताबिक के बारे में बताया कि जब शबनम ने अपने बेटे को देखा तो वो फफक कर रोने लगी और काफी देर तक अपने बेटे ताज से लिपटी रही। साथ ही वह अपने बेटे को बार बार चुम रही थी। शबनम बार बार अपने बेटे से कह रही थी कि पढ़ लिख कर अच्छा इंसान बनना, मैं बुरी मां हूं मुझे कभी याद मत करना। इस समय शबनम रामपुर जेल में बंद है और उस्मान सैफी ताज को इसी जेल में लेकर गया था। जबकि शबनम को फांसी मथुरा जेल में दी जानी है।

गौरतलब है कि अमरोहा की रहनेवाली शबनम पर अपने परिवार के सात लोगों को मारने का आरोप लगा था। जिसमें ये दोषी पाई गई थी। कोर्ट ने शबनम को फांसी की सजा सुनाई थी। ये अपराध शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर किया था। साल 2008 में शबनम ने अपने परिवार के लोगों को पहले बेहोश किया था, उसके बाद इनकी बेरहमी से हत्या कर दी। इन सात लोगों में शबनम का 10 महीने का भतीजा भी शामिल था।

जिस समय शबनम ने अपने परिवार के लोगों को मारा था, उस समय ये गर्भवती थी। दरअसल शबनम अपने प्रेमी से निकाह करना चाहती थी। लेकिन शबनम के परिवार वाले इस निकाह के खिलाफ थे। जिसके चलते शबनम ने अपने परिवार के सारे लोगों को मार डाला। शबनम और सलीम के केस में 100 तारीखों तक बहस हुई थी। इसमें 29 गवाहों ने शबनम सलीम के खिलाफ गवाही दी थी। इस मामले की सुनवाई 27 महीनों तक चली थी। 14 जुलाई 2010 को शबनम और सलीम को दोषी करार दिया गया था। 15 जुलाई 2010 को दोनों को फांसी की सजा दी गई थी।  जिला जज एसएए हुसैनी ने 29 सेंकेड में इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी।


शबनम साल 2008 से ही जेल में बंद है और इस जेल में शबनम ने अपने बेटे को जन्म दिया था। ताज का जन्म 13 दिसंबर 2008 को हुआ था। जिसे कुछ सालों तक शबनम ने अपने साथ जेल में ही रखा। लेकिन बाद में अपने बेटे को अपने दोस्त उस्मान सैफी को सौंप दिया था। उस्मान सैफी शबनम के साथ ही कॉलेज में पढ़ता था और एक पत्रकार है। उस्मान सैफी अपने पत्नी के साथ मिलकर शबनम के बेटे ताज की देखभाल कर रहा है। ये बुलंदशहर के सुशील विहार कॉलोनी में रहती है।

वहीं फांसी की सजा माफ करने के लिए शबनम ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई थी। जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार नहीं किया है। यानी शबनम को फांसी की सजा देना का कोर्ट का फैसला अभी भी बरकरार है। यहां तक की शबनम को फांसी देनी की तैयारियां भी मथुरा जेल में की जा रही है। लेकिन शबनम का डेथ वारंट अभी तक नहीं आया है। कहा जा रहा है कि डेथ वारंट कभी भी आ सकता है। इसी बीच शबनम के बेटे ताज ने राष्ट्रपति से अपनी मां की फांसी की सजा को माफ करने की मांग की है। उसने कहा कि राष्ट्रपति अंकल मेरी मां को माफ कर दो।