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लॉकडाउन के बाद स्कूलों के लिए सरकार का फरमान, भोजन और परिवहन के अलावा फीस में कटौती करनी होगी

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है. इससे न कोई देश बचा है और न ही कोई बिज़नेस. इसका सबसे बड़ा प्रभाव पड़ा है तो स्कूलों और कॉलेज पर. स्कूलों को बंध हुए लगभग 1 साल होने आ गया है. सरकार के आदेशनुसार धीरे-धीरे उन्हें दोबारा से खोला जा रहा है. इस बीच स्कूल प्रबंधन और पालकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि लॉकडाउन के दौरान बंद रहे स्कूलों की फीस अब क्या होगी.

इस बीच नवीन पटनायक वाली ओडिशा सरकार ने पहल करते हुए लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान बंद रहे राज्य के सभी प्राइवेट स्कूलों से कहा है कि वह अपनी फीस को कम करे.

गौरतलब है कि मंगलवार को स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार ट्यूशन फीस की कटौती 7 अलग-अलग भागों में की जाएगी. सरकार ने यह भी साफ़ किया है कि, जो स्कूल सिर्फ 6 हजार रुपये सालाना फीस लेते हैं, उन्हें किसी भी तरह की कोई कटौती करने की जरुरत नहीं है. जारी की गई इस अधिसूचना की माने तो जो स्कूल 6,001 से लेकर 12,001 रुपये तक सालाना फ़ीस पालकों से लेते हैं, उन्हें ट्यूशन फीस में 7.5 प्रतिशत कटौती करनी होगी.

इसी तरह से 12,001 से 24,000 रुपये तक वार्षिक फीस लेने वाले स्कूलों को 12 प्रतशित तक कटौती करनी होगी, 24,001 से 48,000 रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूलों को 15 प्रतिशत तक वहीं 48,000 से 72,000 रुपये सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को 20 प्रतिशत तक की कटौती करनी होगी. 72,001 से एक लाख रुपये फीस पर 25 प्रतिशत और एक लाख रुपये से अधिक सालाना फीस वसूलने वाले स्कूलों को फीस में 26 प्रतिशत तक की कटौती करनी होगी.

सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार छात्रों से स्कूल इसके अलावा भोजन और परिवहन की फीस भी नहीं लेंगे. इतना ही नहीं यहां पर हॉस्टल शुल्क में 30 प्रतिशत की कटौती के भी फरमान है. आपको बता दें कि राज्य सरकार का यह फैसला उड़ीसा उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद लिया गया है. आदेश में न्यायालय द्वारा सरकार से कोविड-19 महामारी के मद्देनजर शैक्षणिक सत्र 2020-2021 में सभी सहायता प्राप्त एवं गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शुल्क में कटौती करने के बारे में कहा गया था.

इसके बाद यहाँ के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री एसआर दास ने मीडिया से कहा, ‘हमें उम्मीद है कि सहायता प्राप्त एवं गैर सहायता प्राप्त करने वाले स्कूल अदालत के इस आदेश का ईमानदारी से पालन करेंगे.’

गौरतलब है कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के कारण स्कूल और कॉलेज पिछले साल मार्च से भी बंद है. इस दौरान सभी तरह की परीक्षाएं भी निरस्त कर दी गई थी. बोर्ड़ स्कूल के एग्जाम भी काफी समय बाद हुए थे. अन्य क्लास के छात्रों को सरकार की तरफ से जनरल प्रमोशन दिया गया था. अब जहां एक बार फिर हम न्यू नार्मल की तरफ लौट रहे है, सभी कामों के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज दोबारा पटरी पर लौट रहे है. बता दें कि कोरोना के कारण दुनिया भर में लगभग 3 महीने से ज्यादा का सक्रिय लॉकडाउन लगाया गया था. इसके बाद दोबारा कोरोना ने अपने पैर पसारना शुरू कर दिए है. जहां भारत में कोरोना की वैक्सीन लग्न शुरू हो गई है, वहीं अन्य देश दोबारा से लॉक डाउन की और बढ़ रहे हैं. ब्रिटेन, जर्मनी , भूटान जैसे देशों में एक बार फिर से लॉकडाउन लगाया जा चुका है.

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