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किसान यूनियन के वकीलों को CJI ने लगाई फटकार, कहा-पहले आप कोर्ट के अधिकारी हैं, फिर किसी के वकील

किसान आंदोलन का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई भी की गई थी। ये सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी। सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कृषि के तीनों कानूनों के अमल पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। साथ में ही एक कमेटी का गठन भी किया है। हालांकि इस सुनवाई के दौरान किसानों का पक्ष रखने के लिए कोई भी वकील कोर्ट में मौजूद नहीं था। किसान यूनियन के वकीलों के कोर्ट में नहीं आने से चीफ जस्टिस नाराज हो गए और इन्होंने किसान के वकीलों को फटकार लगाई।

किसान यूनियन की ओर से ये केस लड़ा जा रहा है और कोर्ट में  दुष्यंत दवे, प्रशांत भूषण, कॉलिन गोंसाल्विस और एचएस फूलका द्वारा किसान यूनियन का प्रतिनिधित्व किया जा रहा है। भूषण, गोंसाल्वेस और फूलका ने सोमवार को सीजेआई एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया था कि दुष्यंत दवे इनका नेतृत्व कर रहे हैं और दुष्यंत दवे द्वारा कोर्ट में कृषि यूनियनों के विचारों को बताया जाएगा। सोमवार को कोर्ट में दुष्यंत दवे ने कहा था कि किसान गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली नहीं करेंगे। इसके अलावा इन्होंने मंगलवार को कोर्ट में किसानों की प्रतिक्रिया बताने की बात भी कही थी। लेकिन ये मंगलवार को कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, वकीलों ने किसानों की प्रतिक्रिया के साथ आने के लिए मंगलवार तक का समय कोर्ट से मांगा था। लेकिन मंगलवार को कोर्ट में किसान के चारों वकीलों में से एक वकील भी उपस्थित नहीं हुआ। जिसके कारण सीजेआई ने सुनवाई के दौरान चारों अनुभवी वकीलों के प्रति नाराजगी प्रकट की। सीजेआई ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि बार के सदस्य, जो पहले अदालत के अधिकारी हैं और फिर अपने मुवक्किलों के वकील हैं। उनसे कुछ वफादारी दिखाने की उम्मीद की जाती है। आप अदालत के सामने तब हाजिर होंगे जब ये आपके अनुरूप होगा और यदि नहीं होता है तो आप नहीं आएंगे। आप ऐसा नहीं कर सकते हैं।

CJI ने आगे कहा कि सोमवार को किसान के वकील दुष्यंत दवे ने निष्पक्ष रूप से कहा कि उनके क्लाइंट ट्रैक्टर मार्च आयोजित नहीं करेंगे। ये उन्होंने तब कहा था जब हमने कहा था कि किसान, समिति के सामने क्यों नहीं आ सकते हैं। जब वे सरकार के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए सहमत हैं। तो फिर समिति से मिलने में क्या परेशानी है। सीजेआई ने कहा था कि यदि किसान समस्या को हल करना चाहते हैं। तो आप इसे बातचीत करके ही हल कर सकते हैं। अन्यथा, आप वर्षों तक आंदोलन कर सकते हैं।

CJI की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हम समस्या का हल करना चाहते हैं। हम जमीनी स्थिति जानना चाहते हैं। इसीलिए समिति का गठन किया जा रहा है। ये सभी हितधारकों से बात करेगा। हमें एक रिपोर्ट दें। रिपोर्ट के आधार पर, हम आगे बढ़ेंगे और रिपोर्ट की वैधता का निर्धारण करेंगे।

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