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मुख़्तार जैसे बाहुबली और माफियाओं की सपा में कोई जगह नहीं है: अखिलेश यादव

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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा शनिवार को पार्टी दफ्तर में बुलाई गई संसदीय बोर्ड की बैठक में इन प्रस्तावों पर मुहर लगा दी। पार्टी ने कौमी एकता दल के विलय को रद्द करने का फैसला किया। मुलायम सिंह यादव ने बैठक के दौरान ही बलराम यादव को उनके घर से बुलवाया। वह बेटे और आजमगढ़ के अतरौलिया से विधायक संग्राम सिंह यादव के साथ बैठक में शामिल हुए। उन्हें बताया गया कि फिर से उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। विलय के मुद्दे पर नाराज मुख्यमंत्री ने 21 जून को बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था।

 

सपा ने पार्टी की छवि पर आ रही आंच को समझते हुए मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल से किनारा कर लिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के बाद पार्टी ने अपने फैसला शनिवार को पलट दिया। साथ ही मंत्रिमंडल से बर्खास्त हुए बलराम यादव को फिर से ससम्मान मंत्री बनाया जाएगा। इसके साथ ही इस मुद्दे को लेकर सपा में चल रही उठापटक अब शांत होती दिख रही है। इस प्रकरण में सीएम अखिलेश और मजबूत होकर उभरे हैं। उन्होंने अपनी बातों को बहुत ही मजबूती के साथ रख कर पार्टी में अपनी और अपने पद की गरिमा को प्रदर्शित किया।

 

सूत्रों के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कौमी एकता दल के विलय पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं। इससे पार्टी व सरकार की छवि पर अच्छा असर नहीं पड़ेगा। चुनाव नजदीक हैं। विरोधी दल इसे मुद्दा बनाएंगे। मुख्यमंत्री के तेवर देख बैठक में शामिल अन्य लोग ज्यादा नहीं बोले। अखिलेश इस मुद्दे पर कड़े तेवर का परिचय तो बलराम यादव जैसे वरिष्ठ मंत्री को बर्खास्त करके दे चुके थे। शनिवार को तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कह दिया कि मुख्तार अंसारी जैसे लोगों की पार्टी को कतई जरूरत नहीं है। जब पार्टी मुखिया ने चेहरा हमें बनाया है, तो जनता के बीच जवाब तो हमें देना होगा। जाहिर है कि मुख्यमंत्री की इस बात को पार्टी ने अच्छे से समझ लिया।

 

अपनी बातों से पलटते हुए यूपी प्रभारी शिवपाल यादव ने कौमी एकता दल के अध्यक्ष और मुख्तार अंसारी के बड़े भाई पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को 21 जून को लाकर मीडिया के सामने सपा में शामिल किया था। उस दौरान कौमी एकता दल के दूसरे विधायक सिगबत उल्ला भी मौजूद थे। तब शिवपाल ने कहा था कि मुख्तार को पार्टी में नहीं लिया गया है।
विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द समाजवादी विकास रथ यात्रा निकालने जा रहे हैं। इसके लिए एक रथ तैयार हो गया है। संसदीय बोर्ड ने इसका नाम तय कर दिया। अखिलेश वर्ष 2012 के चुनाव से पहले भी रथ यात्रा निकाल चुके हैं। एक बार फिर वह इसके जरिए विकास का एजेंडा लेकर जनता के बीच जाएंगे। सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने बताया कि संसदीय बोर्ड के फैसले के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पूरे राज्य में ‘विकास यात्रा’ निकालेंगे।

 

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय और मुख्तार को पार्टी में शामिल किए जाने के मामले पर शनिवार को बेबाकी से चुप्पी तोड़ी। बोले-‘वह मुख्तार जैसे लोगों को नहीं चाहते हैं, मैंने मुख्तार को नहीं लिया है और बतौर मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से उचित फोरम पर इस बात को रखूंगा।’ उन्होंने ताज होटल में एक कार्यक्रम में यह बातें कहीं। कहा कि भाजपा माहौल खराब कर रही है। पहले शामली और अब कैराना में ऐसा ही कुछ किया जा रहा है।

 

कौमी एकता दल पर अपने और शिवपाल में हुए विवादों को सिरे से खारिज करते हुए अखिलेश ने कहा की, शिवपाल जी मेरे चाचा भी है और आपस में अहम् मुद्दों पर विवाद होना लाज़मी है। पिताजी ने बहित भरोसे के साथ मुझे ये जिम्मेदारी सौंपी है, तो मई उन्हें और उत्तर प्रदेश को कभी निराश नहीं करूँगा।

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