कथित गौरक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार और 6 राज्यों को तीन हफ्ते का नोटिस!

आज कल कथित गोरक्षा के लिए दलितों और अल्पसंख्यकों की पिटाई के कई मामले देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में यह बहस का मुद्दा बन गया है कि इस तरह से गोरक्षा के नाम पर सरे राह किसी को भी बिना पूरी सच्चाई जाने पीट देना किस हद तक ठीक है. ऐसे कई मामले सामने आये हैं जिनमें गो तस्करी का आरोप लगाकर कुछ कथित गोरक्षक संगठनों ने दलितों और अल्पसंख्यकों की सरेआम पिटाई कर दी.

ताजा मामला राजस्थान के अलवर जिले का है. जहां कुछ कथित गौ रक्षकों ने अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों पर बिना पूरी बात जाने गौ तस्करी का आरोप लगाकर पिटाई कर दी. यह मारपीट सरेआम सड़क पर हुयी इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. बाद में प्रारंभिक जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि गौ तस्करी के कथित आरोपी संवैधानिक तरीके से गाय खरीद कर अपने साथ ले जा रहे थे.

केंद्र और 6 राज्यों से जवाब तलब :

कथित गौरक्षा के नाम पर देश भर में कई जगह पर हिंसा और मारपीट के मामले सामने आये हैं इसपर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और 6 राज्यों (राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक और महाराष्ट्र) की सरकार को नोटिस भेजा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले ही इस सभी सरकारों से जवाब मांगा था और शुक्रवार को सुनवाई सुनिश्चित की थी.

शुक्रवार तक देना है जवाब :

Caste creed or religion vote

शुक्रवार तक सभी सरकारों द्वारा जवाब नहीं दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. कोर्ट ने इन सरकारों को जवाब देने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्यों की सरकारों से पूछा है कि क्यों न ऐसे गौरक्षकों पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाये. जो गौरक्षा के नाम पर हिंसा फैला रहे हैं. अब इस मामले में 3 मई को सुनवाई होनी है. वहीँ संसद में राज्यसभा में भी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाया और हंगामा किया.

याचिकाकर्ता ने किया 10 मामलों का जिक्र :

याचिका में याचिकाकर्ता शेहजाद पूनावाला ने 10 मामलों का जिक्र किया है जिसमें उत्तर प्रदेश के दादरी में हुए अखलाक हत्याकांड से लेकर गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई और हाल ही में राजस्थान के अलवर जिले में हुयी घटना भी शामिल है. याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे गौरक्षक दल दलितों और अल्पसंख्यकों के लिए खतरा हैं इसलिए इनपर सिमी आतंकी संगठन की तरह ही प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए.

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से गौरक्षा के नाम पर संगठन बना कर दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ मारपीट के कई मामले सामने आये हैं. इन मामलों में बाद में कथित गौरक्षक समितियों को ही दोषी पाया गया. ऐसे कथित रक्षक देश और धर्म दोनों के लिए खतरा हैं जो आवेश में आकर बिना सोचे समझे और बिना पूरा मामला जाने कहीं भी कानून हाथ में लेकर देश की अखंडता को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

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