भूलकर भी नहीं करना चाहिए इन लोगों का अपमान, वरना बनेंगे महापाप के भागी!

जब कोई भी बच्चा पैदा होता है तो उसे बचपन में ही सिखाया जाता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। बच्चे को अच्छे और बुरे के बारे में बचपन से ही बताया जाता है और उनमें फर्क करना भी सिखाया जाता है। हर बच्चे को बचपन में यह भी सिखाया जाता है कि अपने से बड़े लोगों का सदा सम्मान करना चाहिए। इससे उनका आशीर्वाद मिलता है और व्यक्ति इसी के आधार पर जीवन में तरक्की करता है।

सम्मान ना करने वाले होते हैं असफल:

जो लोग अपने से बड़ों का सम्मान नहीं करते हैं, वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते हैं। केवल यही नहीं उनका जीवन दुखों से भर जाता है। ऐसे लोगों का अपमान करना किसी महापाप से कम नहीं माना जाता है। जो लोग इन लोगों का अपमान करते हैं, उन्हें पूजा-पाठ का भी फल नहीं मिलता है। आइये जानते हैं कि हमें अपने जीवन में किन-किन लोगों का भूलकर भी अपमान नहीं करना चाहिए।

श्लोक:
मातरं पितरं विप्रमाचार्य चावमन्यते।
स पश्यति फलं तस्य प्रेतराजवशं गतः।।

*- माता:

मां को भगवान का दर्जा दिया गया है। मां ही है जो किसी भी व्यक्ति को इस दुनिया में लाती है। हर व्यक्ति को अपनी मां का आदर-सत्कार करना चाहिए। भूलकर भी उन्हें कोई कष्ट या उनका अपमान नहीं करना चाहिए। सभी धर्मग्रंथों में मां के अपमान को महापाप की संज्ञा दी गयी है। जो लोग अपनी मां का अपमान करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भी सफलता नहीं मिलती है। जो लोग अपनी मां का सम्मान नहीं करते हैं, भगवान भी उनसे नाराज रहते हैं। इसलिए भूल कर भी या सपने में भी मां का अपमान नहीं करना चाहिए।

*- पिता:

हर व्यक्ति को अपने पिता का सम्मान करना चाहिए। इंसान अगर अपने पिता की बात नहीं मानता और उनका सम्मान नहीं करता है तो उसमें और एक पशु में कोई अंतर नहीं है। पिता ही हमें अच्छे और बुरे में फर्क करना बताते हैं, जो लोग इनका सम्मान नहीं करते हैं वह जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते हैं। इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि अपने माता-पिता का सम्मान करना ही आपका सबसे बड़ा धर्म और कर्म है।

*- गुरु:

गुरु को भगवान के पहले का स्थान दिया गया है। गुरु ही हमें भगवान के बारे में बताते हैं। गुरु ही हमें जीवन की अच्छी-बुरी बातों के बारे में बताते हैं। वही हमारे जीवन को एक दिशा देने का काम करते हैं। गुरु हमें उचित शिक्षा देकर इस दुनिया में रहने के लायक बनाते हैं। ऐसे में गुरु का सम्मान करना हर व्यक्ति का फर्ज है। जो लोग अपने गुरु का अनादर करते हैं, वह सफलता से बहुत दूर रहते हैं।

*- ज्ञानी पुरुष:

पंडित और ज्ञानी व्यक्ति को भगवान के बराबर माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी इनकी संगति में रहता है, उसे कई लाभ प्राप्त होते हैं। ज्ञानी व्यक्ति अपनी सूझ-बूझ से बड़ी से बड़ी परेशानियों का भी हल चुटकी में निकाल लेता है। ऐसे में किसी ज्ञानी व्यक्ति का अपमान किसी पाप से कम नहीं माना जाता है।