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रेल बजट को पेश करने की परंपरा खत्म करने की सिफारिश

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इस फरवरी को सुरेश प्रभु द्वारा पेश किया रेल बजट, आखिरी रेल बजट हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीति आयोग ने प्रधानमंत्री को सौंपे अपने ज्ञापन में रेल बजट पेश करने की परंपरा बंद करने की सिफारिश की है। सरकार ने इस मामले पर रेल मंत्रालय से राय मांगी है। विवेक देबरॉय और किशोर देसाई के नोट में कहा गया है कि रेल बजट लोकप्रिय घोषणायें करने का माध्यम बन के रह गया है।

रेल भवन सूत्रों ने बताया कि आर्थिक कार्य विभाग, वित्त सचिव और कैबिनेट सचिव भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया है कि, इस प्रस्ताव का उद्देश्य रेलवे के क्षेत्र में सुधार लाने और उसे चुस्त और कुशल बनाने का है।

नोट में बताया गया कि 1924 में ब्रिटिश शासन के अनतर्गत भारतीय बजट से रेलवे वित्त को अलग किया गया, लेकिन पिछले वर्षो में ये अंडर इंवेस्टमेंट्स की समस्या से निपटने में विफल रहा है।

नोट में ये भी बताया गया है कि,” रेलवे बजट बस एक घोषणा तंत्र बन के रह गया है, जिसमें नए रूट, नई ट्रेन, नए रोलिंग स्टॉक कारखानों की चर्चा होती है।”

वहीं आयोग की माने तो रेल बजट न पेश होने पर रेल मंत्री के राजनितिक कद में कमी आएगी और रेल मंत्रालय सरकार में अपनी प्रधानता खो देगा।

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