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कारगिल में शौर्यता की कहानी लिखने वाले शहीद विक्रम बत्रा की लव स्टोरी भी है काफी दिलचस्प

7 जुलाई 1999 को करगिल युद्ध में विक्रम बत्रा और उनके साथी शहीद हुए थे। विक्रम बत्रा और उनके साथियों की शहदत को आज भी याद किया जाता है। जिस बहादुरी से इन्होंने करगिल में 5140 की चोटी पर कब्जा किया था और कब्जा करने के बाद ‘ये दिल मांगे मोर’ कहा था, उसने हर किसी का दिल जीत लिया था। इस वीर योद्धा ने देश भक्ती को सबसे आगे रखा था और देश के लिए अपनी मोहब्बत से दूर चले गए थे। आज हम आपको विक्रम बत्रा की देश भक्ती के साथ-साथ इनकी मोहब्बत के बारे में भी बताने जा रहे हैं।

विक्रम बत्रा की लव स्टोरी

विक्रम बत्रा की मुलाकात 1995 में पंजाब यूनिवर्सिटी में एक लड़की से हुई थी। ये दोनों यहां से अंग्रेजी में MA कर रहे थे। इस दौरान इन दोनों में प्यार हो गया। कुछ सालों तक इन्होंने एक दूसरे को डेट भी किया। लेकिन इसी दौरान विक्रम बत्रा सेना में भर्ती हो गए।

विक्रम बत्रा को याद करते हुए इनकी प्रेमिका ने कहा था कि “वो लौटा नहीं और जिंदगी भर के लिए मुझे यादें दे गया”। विक्रम हमेशा मुझसे शादी के लिए कहते थे। साथ ही कहते थे जिसे तुम पसंद करती हो उसका ध्यान रखो। उनके प्यार ने मेरे जीवन को आकार दिया और ये उनके साथ हमेशा-हमेशा तक कैसे रहेगा। बत्रा देश की सेवा में लगे थे और सेना के कई मिशन पूरे करने में व्यस्त थे। जिसकी वजह से हमें कई दिनों तक अलग रहना पड़ता था।

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में 9 सितंबर 1974 को जन्में विक्रम बत्रा करगिल युद्ध से कुछ महीने पहले ही अपने घर पालमपुर गए थे। यहां पर उन्होंने अपने दोस्तों को पार्टी दी थी और उन्हें  ‘न्यूगल’ कैफे ले गए थे। यहां उनके एक दोस्त ने उनसे कहा था कि “अब तुम फौज में हो। अपना ध्यान रखना”। इस पर कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था कि चिंता मत करो। या तो मैं जीत के बाद तिरंगा लहराकर आउंगा या फिर उसी तिरंगे में लिपट कर आऊंगा। लेकिन आऊंगा जरूर।

20 साल पहले हुए थे शहीद

आज के ही के दिन 20 साल पहले यानी 7 जुलाई 1999 को करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा अपने साथी ऑफिसर को बचाते हुए शहीद हुए थे। ऑफिसर को बचाते हुए कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था, ‘तुम हट जाओ। तुम्हारे बीवी-बच्चे हैं।

दरअसल विक्रम बत्रा और उनके साथी नवीन एक बंकर में थे। इस दौरान एक बम नवीन के पैर के पास आकर फटा गया। नवीन बुरी तरह घायल हो गया। विक्रम बत्रा ने तुरंत उन्हें वहां से हटाया, जिससे नवीन की जान बच गई लेकिन कैप्टन ने शहीद हो गए।

परम वीर चक्र से किया था सम्मानित

विक्रम बत्रा की लीडरशिप में ही पाक सेना से कारगिल के प्वांइट 5140 चोटी छीनी गई थी। ये जगह ऊंचाई पर थी और इसकी सीधी चढ़ाई थी। इस जगह पर छुपकर पाकिस्तानी घुसपैठिए भारतीय सैनिकों पर गोलियां चला रहे थे। तब विक्रम बत्रा अगले प्वांइट 4875 को जीतने के लिए चल दिए थे। जो 17 हजार फीट की ऊंचाई पर था और यहां का तापमान 80 डिग्री था।

विक्रम बत्रा की हिम्मत की वजह से ही प्वांइट 5140 चोटी को पाक सेना से आजाद करवाया जा सका। हालांकि इस दौरान ये शहीद हो गए थे। वहीं इनकी बहादुरी के लिए इन्हें परम वीर चक्र भी दिया गया था। ये सम्मान इन्हें 1999 में मरणोपरांत मिला था। शहदत के समय इनकी आयु महज 25 साल की थी। कैप्टन विक्रम बत्रा ने जिस बहादुरी के साथ कारीगल युद्ध लड़ा था। उसके किस्से पाकिस्तान में आद भी महशूर हैं और पाकिस्तानी सेना ने इन्हें ‘शेरशाह’ नाम दिया था।

कारगिल वॉर हीरो शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन पर आधारित शेरशाह फिल्म बनी है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाई है तो वहीं कियारा आडवाणी ने उनकी मंगेतर डिंपल चीमा का किरदार निभाया है । ये फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आई।

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