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उद्धव राज में खुली HBT अस्पताल की पोल, डॉक्टर्स ने कहा- ‘मरीज मर जाएँ तो हमें दोष मत दीजिएगा’

महाराष्ट्र में कोरोना मरीज़ों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खुलती हुई नजर आ रही है। जी हां, कोरोना हब बन चुका महाराष्ट्र के हालात बद से बदत्तर हो जाते जा रहे हैं, जिसके बारे में खुद वहां के डॉक्टर्स ने मीडिया को बताया। दरअसल, मुबई मिरर की खबर के मुताबिक मुंबई के जोगेश्वरी स्थित HBT (हिंदूहृदयसम्राट बाला साहेब ठाकरे) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की जा रही है, जिसकी वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में अब डॉक्टर्स का भी दर्द छलक उठा और उन्होंने अपने मन की बात मीडिया के सामने रख दी।

मुंबई मिरर ने इस अस्पताल के डॉक्टर्स के हवाले से एक खबर प्रकाशित की है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि ऑक्सीजन की कमी से दो हफ्तों में 12 लोगों की जान जा चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस अस्पताल का संचालन बीएमसी के जिम्मे है, लेकिन उसकी तरफ से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। खबरों की माने तो ट्रॉमा सेटर के डॉक्टरों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी दुदर्शा के बारे में भी बताया है।

आईसीयू में हुई मौतों का जिम्मेदार हमें नहीं ठहराया जाना चाहिए- डॉक्टर्स

इस अस्पताल की दुर्दशा पर बात करते हुए मुंबई मिरर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि डॉक्टरो ने अधीक्षक को पत्र लिखा है,  जिसमें उन्होंने निवेदन किया है कि आईसीयू में होने वाली मौतों का जिम्मेदार उन्हें नहीं ठहराया जाना चाहिए। दरअसल, उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि ऑक्सीजन की कमी होने की वजह से वे मरीज़ों को दम तोड़ते हुए देखने के लिए मजबूर हैं, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं है। ऐसे में उन्हें इन मौतों का जिम्मेदार बिल्कुल न ठहराया जाए।

बिगड़ रही है डॉक्टरों की मानसिक स्थिति

पत्र में यह भी लिखा गया है कि साँस के लिए हाँफते हुए मरीजों को मरते देखने के बाद उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है, जिसका असर आने वाले दिनों में उनके काम पर भी पड़ेगा। बता दें कि मरीज़ों को बेहतर इलाज मिले, इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि डॉक्टरों का मानसिक संतुलन बना रहे, वरना मामला गंभीर हो सकता है।

90 प्रतिशत मरीज़ों को होती है ऑक्सीजन की ज़रूरत

मिली जानकारी के मुताबिक,  200 बेड पर लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है। मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, ICU की 25 बेड में से 15 मशीनें ऐसी होती हैं, जिसमें Low O2 Pressure की शिकायत रहती है। ऐसे में महाराष्ट्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसका जवाब वहां की सरकार को जल्द ही देना होगा, वरना मामला बिगड़ सकता है।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने ने किया स्वीकार

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने ने यह स्वीकार किया है कि, अस्पताल में ऑक्सीन की कमी है और प्रति मिनट 3 से 10 लीटर ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा कि, जब हमने कोरोना वायरस के लिए 50 बेड शुरू किए थे, तब 100 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता थी, ऐसे में अब 200 बेड के साथ हमने सिलेंडर की संख्या 350 तक बढ़ा दिया है।  हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हमने 500 ऑक्सीजन सिलेंडर ऑर्डर का दिया है। गुप्त सूत्रों की माने तो कई मरीज गंभीर हालत में अस्पताल आते हैं और उन्हें ऑक्सीन नहीं मिल पाता है, जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है।

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