Spiritual

भक्तों के प्यारे शंकर जी क्यों धारण करते हैं बाघ की खाल? जानिए इसके पीछे की वजह

समस्त देवों में देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार बताई गई है, यह स्वभाव से बहुत ही भोले माने गए हैं, परंतु जितने यह भोले हैं इनको क्रोध भी उतना ही अधिक आता है, कोई भी इनके स्वभाव को आज तक नहीं समझ पाया है, यदि यह किसी से खुश हो जाते हैं तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं परंतु अगर इनको एक बार गुस्सा आ जाए तो यह अपना तीसरा नेत्र खोलकर भस्म कर देते हैं।

भगवान शिव जी ने अपने शरीर पर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं धारण की गई है, जिनका अपना कुछ ना कुछ महत्व माना गया है, इन सभी चीजों को देवों के देव महादेव श्रृंगार के रूप में धारण करते हैं, भगवान शिव जी के गले में सांप, हाथ में डमरू, त्रिशूल है और रूद्र सहित यह बाघ की खाल भी धारण करते हैं, आप सभी लोगों ने भगवान शिव जी को हमेशा बाघ की खाल पर विराजमान देखा होगा, परंतु यह बाघ की खाल धारण क्यों करते हैं आखिर इसके पीछे क्या वजह है? इसके बारे में एक पौराणिक कहानी बताई जाती है।

शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव क्यों पहनते हैं बाघ की खाल

अगर हम पुराणों के अनुसार देखें तो शिवपुराण में इस बात पर का उल्लेख किया गया है कि आखिर भगवान शिवजी बाघ की खाल धारण क्यों करते हैं? दरअसल, एक कथा अनुसार भगवान विष्णु जी ने हिरण्यकश्यप का नाश करने के लिए नरसिंह अवतार धारण किया था, भगवान विष्णु जी के नरसिंह अवतार में उनका आधा स्वरूप सिंह का था और आधा स्वरूप नर का था, ऐसा माना जाता है कि जब नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु जी ने हिरण्यकश्यप का वध किया तब उसके पश्चात यह अत्यधिक क्रोधित हो गए थे, जब भगवान शिव जी ने नरसिंह भगवान का गुस्सा देखा तो उन्होंने वीरभद्र नाम का एक अंश अवतार उत्पन्न किया था।

भगवान शिव जी ने वीरभद्र से कहा था कि वह जाकर नरसिंह देवता से अनुरोध करें कि वह अपने गुस्से का त्याग कर दे, भगवान शिव जी के कहने पर वीरभद्र ने नरसिंह भगवान से अपना क्रोध त्याग करने के लिए कहा परंतु यह नहीं माने थे, तब वीरभद्र ने शरभ रूप धारण किया था, शरभ रूप में वीरभद्र ने इंसान, सिंह और गरुड़ का रूप धारण किया था, जिसकी वजह से उन्हें शरभ नाम की प्राप्ति हुई थी, इसके पश्चात शरभ और नरसिंह भगवान में युद्ध शुरू हो गया था, शरभ काफी गुस्से में आ गए थे और इन्होंने नरसिंह भगवान को अपने पंजे में दबोच लिया था और उनको अपनी चोंच से बार-बार वार करके घायल करना आरंभ कर दिया था, तब नरसिंह भगवान अत्यधिक घायल अवस्था में हो गए थे, तब उन्होंने अपने शरीर का त्याग करने का निर्णय लिया था।

तब भगवान शिव जी ने नरसिंह भगवान के इस निवेदन को स्वीकार कर लिया था और उन्होंने नरसिंह भगवान के चमड़े को अपने आसन और वस्त्र के रूप में धारण किया, यही वजह है कि भगवान शिव जी बाघ की खाल पहनते हैं और बाघ की खाल के ऊपर विराजमान होते हैं।

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