अध्यात्म

800 साल पुराने रामप्पा मंदिर में छिपे हैं हैरान कर देने वाले रहस्य, विज्ञान ने भी जोड़ लिए हाथ

रामप्पा मंदिर में भगवान शिव विराजमान हैं, लेकिन इस मंदिर को उसके भगवान के नाम से नहीं जाना जाता

हमारे देश में जितने तरह के भगवान पूजे जाते हैं उतने तरह के मंदिर मौजूद हैं। इनमें से बहुत से मंदिर ऐसे हैं जो अपनी महिमा और अपने चमत्कार के चलते भक्तों के बीच बहुत प्रचलित रहते हैं। ऐसे ही एक मंदिर हैं रामप्पा जो कि तेलंगाना के मुलुगू जिले के वेंकटापुर मंडल के पालमपेट गांव की एक घाटी में स्थित है। आमतौर पर कोई भी मंदिर वहां पर स्थापित भगवान के नाम से जाना जाता है, लेकिन रामप्पा मंदिर का नाम उस मंदिर के शिल्पकार के नाम पर पड़ा है। इस मंदिर से जुड़ी कुछ बाते ऐसी हैं जो लोगो को हैरान कर देती हैं।

इसलिए नाम पड़ा रामप्पा

पालमपेट एक छोटा सा गांव हैं, लेकिन सैकड़ों साल से आबाद है। इस गांव में ही स्थित है रामप्पा मंदिर जो अपनी अलग खूबियों के चलते देशभर में मशहूर है। रामप्पा मंदिर में भगवान शिव का स्थान है। इस कारण इसे रामलिंगेश्वर मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर को बनाने की कहानी बेहद ही दिलचस्प है। साथ ही ये भी आप जानेंगे कि आखिर शिव के विराजमान होने के बाद भी इस मंदिर का नाम इसको बनाने वाले के नाम पर क्यों रखा गया।

कहा जाता है कि 1213 ईस्वी में आंध्र प्रदेश के काकतिया वंश के महराजा गणपति देव के मन में अचानक से एक शिव मंदिर बनाने का विचार आया। वो एक ऐसी मंदिर की चाहत रखते थे जो सालों तक मजबूती के साथ खड़ा रहे और बेहद खूबसूरत है। ऐसे में उस समय के बेहतरीन शिल्पकार रामप्पा को आदेश दिया गया कि वो भगवान शिव का एक खूबसूरत और मजबूत मंदिर बनाए।

रामप्पा ने राजा के आदेश का पालन किया और मंदिर का निर्माण कार्य शुरु किया। कुछ ही समय में रामप्पा ने बेहद ही खूबसूरत भव्य और विशाल मंदिर का निर्माण किया। जब राजा ने उस मंदिर को देखा तो उसकी कलाकृति से प्रभावित हो गए। उन्हें मंदिर की भव्यता देखकर इतनी खुशी हुई कि उन्होंने उस मंदिर का नाम ही उस शिल्पकार के नाम पर रख दिया।

सदियों बाद भी मजबूती से खड़ा है मंदिर

ये मंदिर 800 सालों से आज भी सुरक्षित तरीके से बसा हुआ है। 13वीं सदी में जब मशहूर इटैलियन व्यापार और खोजकर्ता मार्को पोलो भारत आए तो इस मंदिर की खूबसूरती में खो गए। उन्होंने इसे मंदिरों की आकाशगंगा में सबसे चमकीला तारा बताया। ये खूबसूरत मंदिर इतने सालों बाद भी उतनी ही मजबूती के साथ खड़ा है। ऐसे में कुछ साल पहले लोगों के मन में अचानक सवाल पैदा हो गया कि ये मंदिर टूटता क्यों नहीं।

दरअसल इस मंदिर के बहुत बाद भी मंदिर बने थे, लेकिन आंधी-तूफान और समय के आगे बेबस होकर खंडहर में बदल गए। वहीं रामप्पा मंदिर इतने सालों बाद भी जस का तस खड़ा है। ऐसे में ये बात जब पुरातत्व विभाग के पास पहुंची तो वो मंदिर की जांच के लिए पालमपेट गांव पहुंचे। विभाग ने बहुत कोशिश कि लेकिन इस मंदिर का ये राज नहीं समझ सके कि इतने सालों के बाद भी ये इतनी मजबूती से कैसे खड़ा है।

वैज्ञानिक भी रह गए हैरान

पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने इस मंदिर की मजबूती का राज जानने के पत्थर के एक टूकड़े को काटा। इस पत्थर से उन्हें ऐसी जानकारी पता चली की वो हैरान रह गए। असल में वो पत्थर बहुत हल्का था और जब उसे पानी में डाला गया तो डूबने के बजाए वो पत्थर तैरेने लगा। इसके बाद विभाग को ये बात समझ आ गई कि सारे प्राचीन मंदिर इस कारण से टूट गए क्योंकि उमें भारी-भरकम पत्थरों का इस्तेमाल हुआ था। वहीं रामप्पा ने मंदिर बनाने के लिए हल्के पत्थरों का इस्तेमाल किया था जिसके कारण मंदिर हमेशा सुरक्षित खड़ा रहा।

हैरान कर देने वाली बात ये भी कि इतने हल्के पत्थर रामप्पा को कैसे मिले? क्योंकि रामसेतु के पत्थरों को छोड़ दें तो आज तक ऐसे कई पत्थर नहीं पाए गए हैं जो पानी में तैर सकें और बेहद हल्के हों। ऐसे में ये सवाल भी उठता है कि क्या इन पत्थरों को भी रामप्पा ने बनाया था? क्या वो कोई ऐसी तकनीक जानते थे जिनसे इतने हल्के पत्थर बन सकते थे? ये कुछ सवाल ऐसे हैं जिन्हें विज्ञाभ अभी तक उलझा नहीं पाया है और अपने इन्हीं रहस्यों के कारण ये मंदिर चर्चा में बना रहता है।

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