लालू ने रची थी नीतीश का ‘तख्तापलट’ करने की साजिश, पीएम मोदी बने नीतीश के संकटमोचन!

नई दिल्ली – बिहार में सत्ता की साझेदार जेडीयू और आरजेडी के नेताओं के बीच अक्सर तीखी बयानी की खबरें आती रहती हैं। लेकिन इस बार तो लालू ने ऐसी साजिश रची थी कि नीतीश कही के नहीं रह जाते। उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ता। दरअसल लालू ने यूपी चुनावों के परिणामों पर नजर रखते हुए नीतीश कुमार के ‘तख्तापलट’ की साजिश की थी, लेकिन यूपी में नरेंद्र मोदी के तूफान ने उनकी साजिश को कामयाब नहीं होने दिया। एक न्यूज पेपर ‘जनसत्ता’ में छपी खबर के अनुसार लालू यादव ने अपने पुत्र तेजस्वी को सीएम की कुर्सी पर बिठाने का प्लान बनाया था। इसी प्लान के तहत राबड़ी देवी और आरजेडी के अन्य नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया था कि बिहार की जनता तेजस्वी को सीएम की कुर्सी पर देखना चाहती है। Lalu planned to dethrone nitish.

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यूपी में भाजपा के प्रचंड बहुमत से धरी की धरी रह गई चाल –

गौरतलब है कि इसी प्लान के तहत कुछ दिन पहले लालू प्रसाद यादव ने बयान दिया था कि ‘‘मैं और नीतीश कुमार जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं यानी बूढ़े हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में तेजस्वी प्रसाद यादव जैसे होनहार युवक ही हम दोनों की राजनीतिक विरासत को संभालेगें।’’ लालू किसी भी तरह से बेटे तेजस्वी को बिहार का सीएम बनाना चाहते थे।

लेकिन, यूपी विधानसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी की सुनामी में भाजपा की प्रचंड जीत ने लालू की साजिश को कामयाब नहीं होने दिया। इस बात का खुलासा होने के बाद, यह बात भी सामने आई है कि, नीतीश के तख्ता पलट का संकेत यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने भी एक साक्षात्कार के दौरान दिया था। इससे इस बात का भी संदेह होता है कि अखिलेश भी इस साजिश में शामिल थे।

Lalu planned to dethrone nitish

तेजस्वी को सीएम बनाने की थी तैयारी, नतीजों से धरी रह गई रणनीति –

अगर अखिलेश के साक्षात्कार पर गौर किया जाए तो लालू और अखिलेश यादव की सोच यह थी कि, यूपी विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अखिलेश यादव को नरेन्द्र मोदी के विकल्प के रूप में देखा जाने लगेगा। फिर युवा नेतृत्व की बात कर नीतीश कुमार को कमजोर करने के लिए जमीन तैयार की जाएगी और उन्हें सीएम के ओहदे से बेदखल कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि बिहार में 243 विधानसभा सीटे हैं, जिनमें से आरजेडी के 80 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं। ऐसे में बहुमत के लिए उन्हें 15 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होती। खबरों के अनुसार, नीतीश को इस साजिश का पता पहले ही चल गया था, इसी कारण उन्होंने खुद को यूपी चुनाव से दूर कर लिया था। यूपी चुनाव में पीएम मोदी की ऐसी आंधी चली कि लालू की यह रणनीति धरी की धरी रह गई।

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