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कोरोना संक्रमण को रोकने में केजरीवाल पूरी तरह से हुए फेल, दिल्ली में 1000 से ज़्यादा संक्रमित

यूं तो दिल्ली एक छोटा सा राज्य है लेकिन यहां कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या देश में दूसरे नंबर पर है

भारत में कोरोना का संकट बढ़ता जा रहा है और इससे निजात पाने के लिए केंद्र सरकार के साथ साथ राज्य सरकारें भी तमाम कोशिशों में जुटी हुई हैं। कोरोना का खतरा भी दिल्ली जैसे छोटे से राज्य में बाकी राज्यों के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा है। पूरे भारत में कोरोना संक्रमित व्यक्तिओं की संख्या में दिल्ली दूसरे नंबर पर है जब की महाराष्ट्र पहले नंबर पर है । लेकिन आप को यह भी जानना ज़रूरी है की दिल्ली का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है जब की महाराष्ट्र जहां पूरे भारत में सब से ज़्यादा कोरोना का संक्रमण फैला है उस महाराष्ट्र का क्षेत्रफल 307,713 वर्ग किलोमीटर है। इस का सीधा सा मतलब है की महाराष्ट दिल्ली से 200 गुना से भी ज़्यादा बड़ा है ।

महाराष्ट्र में कोरोना के 1700+ मरीज़ हैं और दिल्ली में 1000+ मरीज़ है (India COVID-19 tracker के आंकड़े के अनुसार ) । इस से साफ़ पता चलता है की केजरीवाल की सरकार कोरोना का संक्रमण रोकने में पूरी तरह से फ़ैल साबित हुई है । तामिलनाडु, राजस्थान, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी कोरोना का संकट कुछ ज़्यादा है । जहां इन राज्यों की सरकार सारे दांव-पेच लगाकर कोरोना से निपटने की तैयारी कर रही है। वहीं बीजेपी साउथ दिल्ली सांसद रमेश बिदुरी का मानना है कि केजरीवाल सरकार कोरोना से निपटने के मामले में एक दम फेल है। इतना ही नहीं ईस्ट दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर ने भी केजरीवाल के प्रयासों को असफल बताया है।

बिदुरी ने केजरीवाल की योजना को बताया फेल

रमेश बिदुरी ने अपने बात रखते हुए कहा कि मैं ये बातें इसलिए नहीं बोल रहा हूं क्योंकि मैं विपक्ष में हूं, लेकिन केजरीवाल के काम को फेल ही माना जाएगा। उन्होंने राशन देने के लिए एक एप लॉन्च किया है और ये काम भी कैसे पूरी तरह सफल होगा इसे भी साफ नहीं बताया गया है। उससे भी खास बात ये की आप एक गरीब आदमी से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि उसके पास स्मार्ट फोन या इंटरनेट होगा की वो इस एप से मुश्किल घड़ी में राशन मंगा ले।

बता दें की दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा था की उन लोगों को भी राशन उपलब्ध कराया जाएगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। हालांकि उन लोगों को राशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा औऱ फिर सरकार उन्हें राशन उपलब्ध कराएगी। इस पर बिदुरी का कहना है कि ऐसे में जरुरतमंदों को मौका भी नहीं मिल पाएगा और जिनके पास पहले से राशन है वो भी राशन कार्ड दिखाकर सारा सामान ले जाएंगे।

गंभीर ने दिल्ली सरकार पर साधा निशाना

बीजेपी विधायक अजय महावर ने भी राशन सप्लाई पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका दावा है की नरेला के लिए राशन की जो क्वांटिटी थी वो काफी कम थी। वहीं गौतम गंभीर जिन्होंने हाल ही में केजरीवाल से ट्वीटर पर बात चीत की थी उन्होंने दिल्ली से लोगों के पलायन के लिए भी केजरीवाल सरकार को दोषी ठहराया है। गंभीर ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने एक दम सटीक डाटा नहीं दिया है की कितना भोजन और राशन लोगों तक पहुंचाया गया है। और अगर वो लोगों के ठहरने का इंतजाम कर चुके थे तो हजारों की संख्या में दिहाड़ी मजदूरों को पलायन क्यों करना पड़ा।

जमीनी जांच मे पाया गया की पलायन कर गए मजदूरों के अलावा जो मजदूर बचे थे उनके ठहरने की व्यवस्था सही नहीं की गई थी। बहुत से मजदूरों को यमुना किनारे खुले आसमान के नीचे सोना पड़ा और ये जगह सीएम के आवास से ज्यादा दूर नहीं थी। इतना ही नहीं बिदौरी ने केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल ने लगातार लोगों को पैनिक करने का काम किया है जिससे यूपी-बिहार से काम करने आए लोग 21 दिन के लॉकडाउन की खबर के बाद घबरा कर वापस चले गए।

लगातार बढ़ रहे हैं दिल्ली में मामले

यहां तक की बिदौरी ने कहा की लोगों को जो भी थोड़ा खाना पीना या समान मिला है वो सब NGOs का दिया गया है ना की केजरीवाल सरकार का। उन्होंने कहा कि हमने केजरीवाल से किचन उपलब्ध कराने की मांग की थी जिससे की हम खाना बना कर गरीबों को बांट सके, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना वायरस के 720 मामले दर्ज किए गए जिसमें 12 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इसके बाद से संक्रमण वाली जगहों को दिल्ली सरकार ने सख्ती के साथ बंद कर दिया जिसमें बंगाली मार्केट भी शामिल है। जैसे जैसे दिल्ली में केस बढ़ता जा रहा है विपक्ष की आवाजें भी केजरीवाल के खिलाफ तेज होती जा रही है। गौतम गंभीर का कहना है कि दिल्ली सीएम कोई भी प्रतिक्रिया देने में देरी कर रहे हैं जिससे की मेडिकल सामानों और पीपीई किट की कमी बढ़ती जा रही है।

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