राजनीति

बड़े बड़े पत्रकार रहे फेक न्यूज़ फैलाने में अव्वल, इन फेक खबरों की सच्चाई आई सामने

हमारा देश सिर्फ कोरोना जैसी महामारी से नहीं लड़ रहा बल्कि ऐसे लोगों से भी इसकी लड़ाई शुरु हो चुकी है जो झूठी खबरें फैला रहे हैं।

हमारा देश सिर्फ कोरोना जैसी महामारी से नहीं लड़ रहा बल्कि इसकी लड़ाई ऐसे लोगों से भी शुरु हो चुकी है जो गलत खबरें फैला कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। दो हफ्ते से लोग अपने घरों में कैद हैं और एक हफ्ते बाद भी लॉकडाउन पूरी तरह से खुलता नजर नहीं आ रहा। लोगों को बहुत तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो कहीं ना कहीं फंसे हुए हैं। लोगों का मनोबल टूटे ना इसके लिए सरकार कई तरह के प्रयास भी कर रही है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन हालातों में भी झूठी खबरें फैलाने पर तुले हुए हैं।

प्रकाश पर्व को लेकर उड़ी झूठी अफवाह

हाल ही में 5 अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से घर की छतों और बालकनियों पर दिए, फ्लैश लाइट और मोमबत्ती जलाने को कहा। पीएम मोदी का कहना था की रात के 9 बजे 9 मिनट के लिए घर की सभी बिजली बंद करके दिए या मोमबत्ती जलाएं। लोगों ने खुशी खुशी इसमें हिस्सा भी लिया, लेकिन ये झूठ फैला दिया गया की घरों की बिजली बंद हो जाएगी तो ग्रिड फेल हो सकती है और पूरे देश की बिजली जा सकती है। हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो अब नए तरह की झूठी खबर फैलाने का काम शुरु किया गया है।

कुछ चैनलों ने एक वीडियो जारी करते हुए बताया की दिया जलाने  के दौरान सोलापुर में हवाई अड्डे पर आग लग गई। असल में जो आग का वीडियो दिखाया गया था वो इसी साल की 3 फरवरी को एयरपोर्ट के बगल झाड़ियों में लगी आग का था। ये वीडियो खुद दो महीने पुराना था। उसी वक्त एयरपोर्ट पर बेहद ही छोटी सी आग लगी थी जिसे समय पर रोक दिया गया था। वहीं इस घटना को इतना बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। ठीक इसी तरह कई पुराने वीडियो को एन वक्त पर वायरल करके ये बताया गया की प्रकाश पर्व मनाते समय ये आग के हादसे हो गए। इतने नाजुक समय में इस तरह की झूठी खबर फैलाना बहुत ही खराब है। राजदीप सरदेसाई रहे फेक न्यूज़ फैलाने में रहे अव्वल

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का बाजार है गर्म

फेक न्यूज फैलाने का सिलसिला सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी धड़ल्ले से मैसेज फॉर्वड किए जाते हैं जिनके बारे में लोग ना सच जानने की कोशिश करते हैं ना ही कुछ समझते हैं, बस उस पर तुरंत यकीन करते हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच में ये फेक खबरें जंगल में लगे आग की तरह हो गईं हैं और बढ़ती ही जा रही है। कुछ समय पहले एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी जिसमें इटली के एक शहर में लाशों का ढेर लगा हुआ था। इटली के हालात को देखते हुए लोगों ने इस तस्वीर को सच मान लिया था, जबकि वो तस्वीर मशहूर फिल्म कांटेजिएन का सीन था।

जियो रिचार्ज को लेकर भी फर्जी खबरें खूब फैलाई गई थीं। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर इस वायरल मैसेज में लिखा गया की जियो इस बुरे वक्त में अपने यूजर्स को 498 रुपए का फ्री रिचार्ज दे रहा है और ये ऑफर सिर्फ 31 मार्च तक के लिए है। जबकि जियो की तरफ से ऐसी कोई भी स्कीम सामने नहीं आई थी। सिर्फ इतना ही नहीं, कोरोना की महामारी से बचने के लिए इस वक्त इसके वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। वहीं एक तस्वीर ऐसी भी फैलाई गई जिसमें दावा किया गया की ये कोरोना की दवा है, लेकिन असल में वो बस एक जांच किट थी। इस समय के गंभीर माहौल में  इस तरह की हरकत बहुत ही शर्मनाक है। ऐसे में किसी भी तस्वीर पर तुरंत भरोसा करने से बचें और तथ्यों को जांच लेने के बाद ही इसे दूसरों तक पहुंचाएं।

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