अध्यात्म

मंदिर में घुसते ही सबसे पहले बजायें घंटी, खत्म हो जायेंगे आपके सौ जन्मों के पाप… जानें क्यों?

अक्सर आपने मंदिरों में घंटियों को लगा हुआ देखा होगा। क्या आपने कभी इस बारे में विचार किया है कि आखिर मंदिरों में घंटियां क्यों लगाई जाती हैं। जिन मंदिरों में घंटियां लगी होती हैं और वह प्रतिदिन बजती हैं, उन्हें जागृत मंदिर कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि देवताओं को नींद से जगाने के लिए घंटियां बजाई जाती हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही घंटी लगाई जाती है, जो दर्शनार्थियों को यह बताने का काम करती है कि मंदिर में आरती और पूजा का समय हो गया है।

घंटी बजाने से बरसती है लक्ष्मी की कृपा:

जो लोग मंदिर में घुसते ही सबसे पहले घंटी बजाते हैं, इससे देवता खुश होते हैं और व्यक्ति के ऊपर सदा लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। अगर आप अपने घर में भी मंदिर की स्थापना कर रहे हैं तो वहां भी घंटियां लगाना ना भूलें। जब कहीं भी पूजा-पाठ हो, चाहे वह घर हो या मंदिर घंटी की आवाज आनी चाहिए। इससे आपके आस-पास की नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है। आपको बता दें कि प्राचीनकाल से ही मंदिरों के मुख्य दरवाजे पर घंटियां लगाने की परम्परा है।

घंटी की आवाज से होता है आस-पास का माहौल पवित्र:

शास्त्रों में ऐसा वर्णित है कि जहां पर हमेशा घंटें की आवाज आती रहती है, वहां का माहौल भी पवित्र बना रहता है। घंटियों की आवाज से नकारात्मक शक्तियों पर रोक लगती है और सकारात्मक शक्ति का संचार होता है। घंटियों की आवाज से इंसान की सुख-समृद्धि सीधे तौर पर जुड़ी होती है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में लगी घंटी को बजाने से इंसान के सौ जन्मों के पाप ख़त्म हो जाते हैं।

सबसे पहले जैन मंदिरों में लगी थीं घंटियां:

ऐसा कहा जाता है कि जब सृष्टि की रचना हुई थी और उस समय जो नाद हुआ था, घंटों से भी वही नाद होता है। इसी नाद को ओंकार के पदाघात से निकला हुआ भी माना जाता है। आपको बता दें सबसे पहले धार्मिक स्थानों पर घंटी लगाने की शुरुआत जैन और हिन्दू धर्म में हुई थी। उसके बाद बौद्ध मंदिरों और चर्च में भी घंटे लगाने की परम्परा शुरू हो गयी।

मंदिरों में घंटियां लगाने के हैं वैज्ञानिक कारण:

आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि मंदिरों में जो घंटे लगाए जाते हैं, उसका केवल धार्मिक आधार ही नहीं है बल्कि वैज्ञानिक कारण भी है। आप तो जानते ही हैं कि घंटी बजाने के बाद बहुत जोर से कम्पन होता है, जो वातावरण में काफी दूर तक जाता है। घंटे के इस कम्पन और ध्वनि से वातावरण में काफी दूर तक फैले हुए सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव खत्म हो जाते हैं और हमारे आस-पास का माहौल पवित्र हो जाता है।

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