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खूबसूरती का नायाब हीरा है ताजमहल, जानें ताज महल का इतिहास

ताज महल का इतिहास: ताजमहल को भारत की शान माना जाता है और हर साल लाखों की संख्या में लोग ताजमहल को देखने के लिए आगरा आते हैं। ताजमहल प्यार की स्मारक के तौर पर प्रसिद्ध और दुनिया के सात अजूबों में से एक है। ताजमहल का इतिहास काफी रोचक है। ताजमहल को प्रेम का प्रतीक कहा जाता है। क्योंकि इसे मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था।

ताज महल का इतिहास

ताज महल का इतिहास

भारत पर कई सालों तक मुगलों का शासन रहा है और मुगलों ने भारत में कई सारी स्मारक बनाई हैं। इन्हीं स्मारकों में से ताजमहल एक है। ताजमहल मुगलों द्वारा बनाई गई सभी स्मारकों में से सबसे अलग है। ताजमहल को मुगल शासक शाहजहां द्वारा बनाया गया था। ताज महल के इतिहास के अनुसार शाहजहां ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था। ताजमहल के जरिए शाहजहां की मुहब्बत आज भी जिंदा है।

ताज महल का इतिहासकारों के मुताबिक आगरा मुगलों का सबसे पसंदीदा शहर हुआ करता था और आगरा कई समय तक मुगलों की राजधानी थी। इब्राहिम लोदी ने आगरा शहर को सन् 1504 में बसाया था। जब शाहजहां मुगलों के बादशाह बनें थे तो उन्होंने कई सारी इमारतों का निर्माण करवाया। जिनमें से ताजमहल एक है।

ताजमहल का इतिहास

अन्य देशों से बुलाए गए थे कारीगर

ताजमहल बनाने के लिए बगदाद से कारीगरों को बुलाया गया था। सफेद संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने की जिम्मेदारी मध्य एशिया के बुखारा शहर के एक कारीगर को दी गई थी। जबकि ताजमहल की गुंबदों को बनाने के लिए तुर्की के इस्तम्बुल से कारीगर आए थे। इसी तरह से कई देशों से कारीगरों को ताजमहल बनाने के लिए बुलाया गया था।

ताज महल का इतिहास

कुशल कारीगरों को तलाश करने में 6 महीने का वक्त लगा था और 6 महीने बाद 37 बेहतरीन कारीगरों को इकट्ठा किया गया था। ताजमहल को बनाने के लिए 37 कारीगरों के अलावा 20 हजार मजदूरों को काम पर लगाया गया था। ताजमहल को सफेद संगमरमर पत्थर से बनाया गया है और ये पत्थर राजस्थान के मकराणा से लाया गया था। इसके अलावा को बनाते समय उसमें बेशकीमती रत्नों का प्रयोग भी किया गया था जो कि फगानिस्तान, तिब्बत, इजिप्त, रूस, ईरान आदि देशों से लाए गए थे।

22 सालों में बनकर तैयार हुआ था ताजमहल

  • ताजमहल को बनाने में कई सालों का वक्त लगा था। ताजमहल को बनाने का काम  ई. 1630 में शुरू हुआ था और ये निर्माण कार्य करीब 1652  तक चला था
  • ताजमहल की गुंबदे बेहद ही सुंदर है और ताजमहल की गुंबदों के ऊपर बेहद ही सुंदर नक्शी की हई है।
  • ताजमहल की मुख्य गुंबद 60 फीट ऊंची है और 80 फीट चौड़ा है। इस गुंबद पर कई बेशकीमती रत्न भी जड़े गए थे। हालांकि इन रत्नों को अंग्रेजों के समय निकाल लिया गया था।

मुमताज महल की क्रब

ताजमहल का इतिहास

मुमताज महल की मृत्यु होने के बाद उन्हें ताजमहल में दफनाया गया था और इस जगह पर इनकी क्रब है। वहीं शाहजहां की मृत्यु के बाद उनको भी मुमताज के साथ ही दफनाया गया था। इन दोनों की क्रब ताजमहल के अंदर एक साथ है।

ताज महल का इतिहास से जुड़ी रोचक जानकारी

  • बेगम मुमताज मुगल बादशाह शाहजहां की तीसरी बेगम थी। मुमताज महल की मृत्यु अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते हुए हुई थी।
  • ताजमहल के प्रवेश दरवाजे पर कुरान का अभिलेख हैं, जिसमें कहा गया है कि ‘हे आत्मा, तू ईश्वर के पास विश्राम कर। ईश्वर के पास शांति के साथ रह और उसकी परम शांति तुझ पर बरसे।
  • ऐसा कहा जाता है कि ताजमहल पूरा होने के बाद शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ताकि वो दोबारे से इसे ना बना सकें।
  • ताजमहल बनाने में बहुत खर्चा आया था और इसे बनाने के चलते मुगलों का सारा शाही खजाना खत्म हो गया था।
  • ताज महल का इतिहास के अनुसार शाहजहां ताजमहल के सामने ही काले संगमरमर का ताजमहल भी बनाना चाहते थे। लेकिन उससे पहले ही शाहजहां की मृत्यु हो गई।

होता है मेले का आयोजन

ताजमहल विश्व भर प्रसिद्ध है और दुनिया भर से कई लोग ताजमहल आया करते हैं। हर साल पर्यटन विभाग की ओर से ‘ताज महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है और इस महोत्सव को देखने के लिए कई सैलानी ताजमहल आते हैं।

ताजमहल कहां हैं

  • ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित है। ताजमहल के पास ही यमुना नदी है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। आगरा सड़क मार्ग, वायुमार्ग और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है।
  • आगरा कई राष्ट्रीय मार्गों से जुड़ा हुआ है और दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रसिद्ध शहरों से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है।  दिल्ली से ताजमहल की दूरी 231 किलोमीटर है।
  • ताजमहल का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा दिल्ली एयरपोर्ट है। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर यहां से आगरा जाने के लिए गाड़ी या टैक्सी आसानी से मिल जाती है। वहीं दिल्ली रेलवे स्टेशन से आगरा रोज रेल भी जाती है। दिल्ली से आगरा बस के जरिए भी जाया जा सकता है।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: राजा-की-मंडी, आगरा किला, आगरा कैंट
  • निकटतम बस स्टेशन: सेंट्रल बस स्टेशन आगरा

ताजमहल से विभिन्न सथानो की दूरी

आगरा से दिल्ली 231 किमी
आगरा से जयपुर 234 किमी
आगरा से ग्वालियर 125 किमी
आगरा से नोएडा 165 किमी

शुल्क

  • प्रवेश शुल्क (भारतीय) INR 45
  • प्रवेश शुल्क (विदेशी) INR 1050
  • 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे के लिए नि: शुल्क

ताजमहल खुलने का समय

सुबह 6 बजे से शाम 6.30 बजे तक ताजमहल खुला रहता है और शुक्रवार के दिन ये बंद रहता है।

ताजमहल जाने का सबसे अच्छे समय

ताजमहल जाने के लिए सितंबर से नंवबर और फरवरी से अप्रैल के बीच का समय सबसे उत्तम है। क्योंकि इस समय आगरा का मौसम अच्छा होता है।

कहां रुके

आगरा में आसानी से रोकने के लिए होटल मिल जाएंगे।

अगर आप अभी तक ताजमहल नहीं गए हैं तो एक बार इस जगह जरूर जाएं। आगरा में ताजमहल के अलावा देखने के लिए अन्य पर्यटक स्थल भी मौजदू हैं। ताजमहल से कुछ ही घंटों की दूरी पर आगरा फोर्ट और फतेहपुर सीकरी है। आगरा फोर्ट और फतेहपुर सीकरी को भी मुगलों द्वारा बनाया गया है। ये दोनों इमारतें भी बेहद ही सुंदर तरह से बनाई गई हैं।

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