अध्यात्म

शनिदेव के इस मंदिर में तेल अर्पित करके गले मिलने से हो जाते हैं व्यक्ति के सारे कष्ट दूर!

मध्य प्रदेश में कई ऐसी जगहें हैं जो आपको रोमांच से भर देंगी। लेकिन इन सबमें सबसे ख़ास है, ग्वालियर के पास स्थित शनिदेव का मंदिर। आपको बता दें इस शनि मंदिर को देश का सबसे प्राचीन शनि मंदिर माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि महाराष्ट्र के शिगनापुर में स्थित शनि की मूर्ति को इसी जगह के पर्वत से ले जाया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बारे में एक प्राचीन कथा भी प्रचलित है। आज हम आपको उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

शनिदेव को बंधक बनाया था रावण ने:

प्राचीन समय के रावण के बारे में तो आप जानते ही होंगे? अरे वही रामायण वाला रावण, जिसने माता सीता को बंदी बना लिया था। रावण को लोगों को अपने कैद में रखने में मजा आता था। इसलिए उसने एक बार शनिदेव को भी कैद कर लिया। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुँचे तो उन्होंने शनिदेव को भी रावण के कैद में देखा। राम के प्रिय भक्त हनुमान को देखकर शनिदेव ने उनसे रावण की कैद से मुक्त कराने का आग्रह किया।

हनुमान जी ने लंका से फेंक दिया था शनिदेव को:

शनिदेव की बात सुनते ही हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से उठाकर कही दूर फेंक दिया, ताकि वह सुरक्षित स्थान पर पहुँच सकें। जब हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से फेंका था तो वह ग्वालियर के पास आकर यही गिरे थे। उसके बाद से ही यह क्षेत्र शनि क्षेत्र के नाम से जाना जाने लगा। जब हनुमान जी ने शनिदेव को उठाकर लंका से फेंका तो एक तेज रौशनी सी चमक हुई। पत्थर के रूप में शनिदेव के यहाँ गिरने से एक बड़ा गड्ढ़ा बन गया। यह गड्ढ़ा आज भी यही मौजूद है।

शनिदेव को गले लगाकर बताते हैं लोग अपनी समस्याएँ:

ऐसा माना जाता है कि शनिचरी अमावस्या के दिन भक्त इस मंदिर में अपने कष्टों के साथ आते हैं। इस मंदिर की सबसे ख़ास बात यह है कि यहाँ तेल अर्पित करने के बाद शनिदेव को गले लगाने की परम्परा है। यहाँ जो भी भक्त शनिदेव के दर्शन के लिए आता है, वह तेल अर्पित करने के बाद शनिदेव को गले लगाकर अपनी समस्याओं के बारे में बताता है। ऐसा कहा जाता है कि यह करने के बाद उस व्यक्ति की सारी परेशानियाँ दूर हो जाती हैं। इस मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Close