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शख्स ने 200 डॉलर में मंगवाई देश की मिट्टी, ताकि देश की मिट्टी पर पड़े बच्चे का पहला कदम

अक्सर सभी लोगों के मन में देशप्रेम की भावना मौजूद होती है. लोग आपस में भले ही कितना लड़ ले पर जब देश की बात आती है तो सभी लोग आपस की लड़ाई भूल कर देश के लिए एक हो जाते हैं. ऐसा ही एक मामला आजकल सामने आ रहा है. जिसमे देशप्रेम की एक ऐसी अनोखी मिसाल देखने को मिली जिसने सभी लोगो को हैरानी में डाल दिया. ये मामला कुछ दिनों पहले का है. पर आज के समय में यह घटना सभी लोगों को बहुत अधिक भावुक कर रही है.

दरअसल, अमेरिकी पैराट्रूपर सेना के जवान टोनी ट्रेकोनी की यह इच्छा थी कि जब भी उनका बच्चा इस दुनिया में आये तो उसका जन्म अमेरिका यानी उनकी मातृ भूमि पर ही हो. लेकिन जब उनकी पत्नी गर्भवती हुई उस वक़्त वह इटली के प्रांत पडुआ में पोस्टेड थे. उन्हें यह आशा थी की पत्नी की डिलीवरी होने से पहले वह अपने देश वापस आ जायेंगे. पर अफ़सोस ऐसा हुआ नहीं. इसके बाद टोनी ने कुछ ऐसा काम किया, जिसके बारे में शायद कोई सोच भी नहीं सकता है!

टोनी ने अपनी पत्नी की डिलीवरी से एक महीने पहले ही अपने प्रांत टेक्सास की मिट्टी इटली मंगवाई. जिससे जब उनके बच्चे का जन्म हो तो वो अपना पहला कदम अपने प्रांत की मिट्टी पर रखे, जहां उसके माता-पिता का जन्म हुआ और वो पले-बढ़े हैं. अपने प्रांत की मिट्टी मंगवाने के लिए उन्होंने टेक्सास में रह रहे अपने माता पिता से कांटेक्ट किया और कहा कि वह एक कंटेनर में वहाँ की मिट्टी भरकर शिप के द्वारा इटली भिजवा दें. अपने प्रांत की मिटटी को इटली मंगवाने के लिए टोनी को 200 डॉलर (लगभग 14 हजार रुपये) खर्च करने पड़े.

जब बच्चे के जन्म की तारीख पास आने लगी तब टोनी ने हॉस्पिटल में अपनी वाइफ के पलंग के नीचे वह मिट्टी छिपा कर रख दी, जिससे उनके बच्चे का जन्म टेक्सास की मिट्टी पर हो. और जैसा टोनी चाहते थे वैसा ही हुआ.टोनी ने आगे कहा की पिछले साल जुलाई महीने में उनका बेटा चार्ल्स पैदा हुआ था. और उसके जन्म के बाद मैंने एक ट्वीट भी किया था. मेरा ये ट्वीट कुछ ख़ास व्यक्तियों के लिए था.टोनी आगे बताते हैं की चार्ल्स के पैदा होने के बाद मैंने अपने प्रांत से आयी हुई मिटटी को बहुत संभाल कर रखा था. और कुछ दिनों पहले मेरे बेटे के पैरों ने उस मिटटी को टच किया और अपने देश की खुशबु को महसूस किया.

अपने बेटे को देश की मिटटी का एहसास दिलनाने के लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार था. मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है की अपने देश से सैकड़ो मील दूर रहने के बाद भी मेरे बेटे ने अपना पहला कदम अपने देश की मिटटी पर ही रखा. ऐसा करने से देश से दूर रहने के बाद भी उसके मन हमेशा देशप्रेम का भाव बना रहेगा.

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