प्रसंग: कोई भी मुकाम पाने के लिए जल्दबाजी ना करें, काबिल होने पर मुकाम अपने आप ही मिल जाता है

अक्सर हम लोग उस मुकाम को पाने के लिए जल्दबाजी कर बैठते हैं जिसके हम काबिल नहीं होते हैं। इस विषय से जुड़ी एक कथा के अनुसार एक गुरु के कई सारे शिष्य होते हैं। इन शिष्यों में से एक शिष्य कई सालों से गुरु के साथ रह रहा होता है। आश्रम में रोज नए शिष्य आया करते थे, जिनको गुरु अच्छाई का पाठ पढ़ाया करता था। एक दिन गुरु के सबसे पुराने शिष्य मे सोचा की मैं इतने सालों से इनका साथ रहा रहा हूं। जो ये ज्ञान अन्य शिष्यों को देते हैं उसमें से काफी हक तक मुझे भी आता है तो क्यों ना मैं भी गुरु बन जाओं और शिष्य को शिक्षा देना शुरू कर दूं।

ये सोचकर इस शिष्य ने अपना भी एक आश्रम शुरू कर दिया और इस आश्रम में कई सारे  शिष्य भी आने लगे। लेकिन धीरे-धीरे शिष्य का ज्ञान कम पड़ता गया है। दुखी होकर ये शिष्य अपने गुरु के पास गया और इसने अपने गुरु से कहा, मैं इतने सालों से आपके साथ हूं लेकिन जब लोगों को ज्ञान देने की बारी आई तो मेरा ज्ञान कम पड़ गया। क्या में जीवन भी शिष्य ही बनकर रहूंगा ? मैं अपने जीवन में गुरु का स्थान पाना चाहता हूं। ये कैसे मुमकिन होगा।

अपने शिष्य की बात सुनक गुरु ने मुस्कुराते हुए कहा, महज कुछ सालों तक मेरे साथ रहने से तुम गुरु का स्थान हासिल नहीं कर सकते हों। ये स्थान हासिल करने के लिए कई वर्षों तक लंबी साधना करना पड़ती और योग्यता निखारी पड़ती है। जब तुम्हारी योग्यता निखर जाएगी तब तुम गुरु बनने के काबिल हो जाओंगे। अपने गुरु की बात सुनकर शिष्य ने प्रश्न पूछते हुए कहा, और कितने वर्षों तक मुझे  इतंजार करना पड़ेगा?

शिष्य की ये बात सुनकर गुरु ने शिष्य को कहा इसका उत्तर में तुम्हें कुछ दिनों बाद दूंगा। जब तक तुम एक पौधा आश्रम में लगा दो। अपने गुरु का आदेश मानते हुए शिष्य ने एक पौधा आश्रम मेें लगा दिया।

गुरु ने अगले दिन शिष्य से पूछा क्या उस पौधे में गुलाब के फूल खिल आए हैं। शिष्य ने कहा, अभी नहीं फूल खिलने में अभी समय लगेगा। कुछ दिनों बाद फिर से गुरु ने शिष्य से पौधे के बारे में पूछा और कहा क्या पौधे में फूल खिल गए हैं। शिष्य ने गुरु से कहा, उस पौधे को लगाए हुए कुछ ही समय हुआ है और उसमें फूल खिलने में अभी काफी वक्त लगेगा। हर चीज का एक समय होता है और जब पौधा अच्छे से बड़ा हो जाएगा तो उसमें फूल खिल आएगा।

अपने शिष्य की ये बात सुनकर गुरु ने उसे कहा तुमने मेरे से सवाल किया था कि कितने वर्षों बाद तुम शिष्य से गुरु बन सकोगे। तुम्हारें सवाल का जवाब ये पौधा है। जिस तरह से इस पौधे के बड़े होने पर अपने आप ही इसमें फूल लग जाएंगे। उसी तरह से जब तुम गुरू बनने के काबिल हो जाओंगे तो तुम्हे भी पता चल जाएगा। हर चीज का एक समय होता है और जब वो समय आता है को खुद ब खुद पता चल जाता है। इसलिए मुकाम पाने के लिए जल्दबाजी ना करों।