क्या फिर से होगी नोटबंदी,पाकिस्तान ने बना लिए 2000 रुपये के नकली नोट!

काले धन और नकली नोटों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी ने देश में नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया था. लेकिन इसके बाद भी पाकिस्‍तान में 2000 रुपये के नकली नोटों के छापे जाने की खबर ने सबको हैरान कर दिया है. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने सरकार को आगाह किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने 2000 रुपए के नए नोटों के करीब 8 से 10 सिक्योरिटी फीचर्स को copy करने में सफतला हासिल कर ली है.

 

पाकिस्‍तान में 2000 रुपये के नकली नोट छापे जा रहे हैं :

खबर आयी है कि पाकिस्‍तान में 2000 रुपये के नकली नोट छापे जा रहे हैं. उन नोटों को बांग्‍लादेश के रास्‍ते भारत में भेजने की तैयारी की गयी है. अभी हाल ही में बीएसएफ ने नकली नोटों के साथ कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है. 2000 के नए नोट जारी होने के दो महीने के बाद ही पाक में बैठे तस्करों ने भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए जाली नोटों की तस्करी शुरू कर दी है. एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल नकली नोटों की खेंप में सिर्फ 2000 के नोट ही बरामद किए गए हैं लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक पाकिस्तान 500 के नकली नोट भी छाप रहा है.

एक अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, तस्कर असली नोट के 17 में से 11 सिक्युरिटी फीचर्स कॉपी करने में कामयाब हो गए हैं. इससे अब नकली नोटों को पहचानना मुश्किल हो गया है. जांच से जुड़े अधिकारियों ने आशंका जाहिर की है जल्द ही ये नकली नोट भारतीय बाजार में पहुंच सकते हैं. हाल ही में केंद्र को भेजे गए एक नोट में कहा गया है कि आईएसआई और उसके गुर्गों ने कुछ सिक्योरिटी फीचर्स की कॉपी कर ली है, लेकिन वह उस पेपर तक नहीं पहुंच पाए हैं, जिसका उपयोग नोट छापने के लिए किया जा रहा है. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईएसआई और उसके गुर्गों उन कागजों तक न पहुंच पाए जो करेंसी छापने के लिए भारतीय प्रिटिंग प्रेस या मिंट में सप्लाई किए जाते हैं.

आठ नवंबर को जिस नोटबंदी का ऐलान हुआ था उसके मुख्य लक्ष्यों में से एक देश में फैल रही फर्जी नोटों की समस्या को खत्म करना भी था. अब जिस रफ्तार से भारत के दुश्मनों ने काम किया है- खबरों के मुताबिक नकली 2000 रु के नोट बैंकों द्वारा असली जारी किए जाने के कुछ घंटों के भीतर ही सीमा पार से देश में दाखिल हो चुके थे. वह बताता है कि भारतीय एजेंसियों को इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए कितना तैयार रहने की जरूरत है.

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