वंदेमातरम पर सुप्रीम कोर्ट का बहूत बड़ा फैसला जानिये क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने …!

राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. राष्ट्रगान की तरह ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को बजाने के लिए न्यायिक निर्देश जारी करने की गुहार को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है. सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता है. उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान मान्यता देने संबंधी एक याचिका शुक्रवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि राष्ट्रीय गीत की कोई अवधारणा नहीं है.

जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राष्ट्रीय गीत संविधान की धारा 51(ए) की सूची में नहीं है. ये केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रीय झंडे के लिए है. आपको बता दें कि वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर कर मांग कर कहा है कि भारत राज्यों का एक एसोसिएशन या कांफेडरेशन नहीं है बल्कि ये राज्यों का एक संघ है. बता दें कि कुछ धर्मिक संगठन काफी समय से ‘वंदे मातरम’ गाने का विरोध भी कर रहे हैं. उनका कहना है ‘वंदे मातरम’ गाना उनके धर्म का उल्लघंन करता है.

इसके साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता की इस मांग पर भी विचार करने से इनकार कर दिया कि दफ्तर, अदालत, विधानसभा और संसद में भी राष्ट्रीय गान बजाना अनिवार्य किया जाना चाहिए. इससे पहले बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवारई करते हुए ये साफ कर दिया था कि फिल्म के बीच में अगर राष्ट्रगान बजाया जाता है तो लोगों को राष्ट्रगान पर खड़े होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा था कि लोगों को फिल्म की सक्रीनिंग से पहले बजने वाले राष्ट्रगान को गाने की भी जरूरत नहीं है.

सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुद्दे पर असमंजस को साफ किया और कहा कि अगर फिल्म के पहले राष्ट्रगान बजता है तो लोगों को खड़ा होना जरूरी है लेकिन फिल्म के बीच में किसी सीन के दौरान यह बजता है तो दर्शक इस पर खड़े होने के लिए बाध्य नहीं हैं. साथ ही यह भी जरूरी नहीं है कि वो राष्ट्रगान को दोहराएं भी. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब राष्ट्रगान बजाया जा रहा हो उस समय पर्दे पर राष्ट्रध्वज दिखाया जाना चाहिए.

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