तुलसी विवाह में शालिग्राम शिला के शामिल करने से मिलते हैं ये 11 ख़ास लाभ, भगवान होते हैं प्रसन्न

प्रयेक वर्ष कार्तिक शुक्ल की एकादशी और द्वादशी को तुलसी विवाह होता हैं. इसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता हैं. इस दिन देव नींद से जाग जाते हैं. इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह किया जाता हैं. शालिग्राम आसल में श्री नारायण ही स्वयंभू स्वरुप माना जाता हैं. त्रिदेव में से शिवजी और विष्णुजी ही दो ऐसे देव हैं जिन्होंने पार्थिव स्वरुप धारण किया था. जैसे नर्मदा नदी से निकले पत्थर को नर्मदेश्वर या बाण लिंग (शिव रूप) माना जाता हैं वैसे ही नेपाल में गंडकी नदी के में मिलने वाले काले रंग के चिकने एवं अंडाकार पत्थर को शालिग्राम कहा जाता हैं. दोनों ही स्थिति में प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती हैं और आप इन्हें घर के मंदिर में सीधा रख पूज सकते हैं.

इस पत्थर के स्वरुप की बात की जाए तो ये अंडाकार होने के साथ साथ छिद्रित भी हो सकते हैं. कुछ में अंदर शंख, चक्र, गदा या पद्म खुदे होते हैं. वहीं कुछ के ऊपर सफेद रंग की चक्रनुमा गोल धारियां भी होती हैं. एक अनुमान के तौर पर इनके विभिन्न रूपों की संख्या 80 से लेकर 124 तक हो सकती हैं. ये एक मूल्यवा पत्थर होते हैं. कुछ में अल्प मात्रा में सोना भी होता हैं. इस कारण कई बार चोर इन्हें चुरा भी लेते हैं. श्री शालिग्राम को तुलसी विवास में अवश्य शामिल करना चाहिए. इसके बिना तुलसी विवाह अधूरा रहता हैं. इनके संग होने से तुलसी माँ प्रसन्न होती हैं. आइये शालिग्राम के कुछ और लाभ जानते हैं.

1. श्री शालिग्राम और तुलसी विवाह करने से दुःख, पाप और रोग दूर होते हैं. साथ ही परिवार में लड़ाई झगड़ा नहीं होता हैं.

2. यदि आप तुलसी शालिग्राम विवाह करते हैं तो आपको वही पुण्य नसीब होता है जो कन्यादान करते समय मिलता हैं.

3. रोजाना स्नान करने के बाद श्री शालिग्राम को तुलसी अर्पित कर उसका चरणामृत पीने से धन की कमी नहीं होती हैं. साथ ही तन और मन की कमजोरियां भी दूर होती हैं.

4. पुराणों के अनुसार भगवान शालिग्राम को घर में रख उनका पूजन करना सभी तीर्थों के दर्शन से भी श्रेष्ठ माना गया हैं. इससे सुख की प्राप्ति होती हैं.

5. इसके महत्त्व का अंदाजा इस बात से ही लगा सकते हैं कि स्वयं शिवजी ने भी स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की थी.

6. ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड अध्याय के अनुसार घर में शालिग्राम की पूजा करने से माँ लक्ष्मी भी वहां निवास करने लगती हैं.

7. पुराणों की माने तो शालिग्राम शिला का जल अपने ऊपर छिड़कना सभी यज्ञों और तीर्थों में स्नान के बराबर होता हैं.

8. रोजाना शालिग्राम शिला का जल अभिषेक करने से संपूर्ण दान पुण्य और पृथ्वी की प्रदक्षिणा का उत्तम फल प्राप्त होता हैं.

9. शालिग्राम शिला के चरणामृत को ग्रहण करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और हम मृत्यु पश्चात विष्णुलोक जाते हैं.

10. शालिग्राम की रोजाना पूजा करने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं. बाधाएं भी ख़त्म होती हैं.

11. पुराणों की माने तो श्री शालिग्राम जी का तुलसीदल युक्त चरणामृत ग्रहण करने से बड़े से बढ़ा विष भी नष्ट हो जाता हैं.

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