अध्यात्म

देखें वीडियो – शिव तांडव पर अघोरी बाबा का नृत्य! शिव जी को कर दिया प्रसन्न!

यह मान्यता है की अपना बल प्रदर्शन करने के लिए रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया था। रावण जब पूरे पर्वत को लंका लेकर जाने लगा तो भगवान शिव ने अपने अंगूठे के हल्के से दबाव दिया, जिससे तो कैलाश पर्वत पुन: वहीं ठहर गया। कैलाश पर्वत के दबने से शिव के महान भक्त रावण का हाथ दब गया और वह पीड़ा में भगवान शंकर से क्षमा करें क्षमा करें बोलने के साथ नृत्य कर स्तुति करने लगा। जिसे कालांतर में शिवतांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। शिव तांडव स्तोत्र में कुल 17 श्लोक हैं। आज हम आपको शिव ताडंव पर अघोरी बाबाओं का ऐसा नृत्य दिखाने जा रहे हैं जो वाकई में कमाल का है। शिवतांडव पर ऐसा नृत्य आपने कभी नहीं देखा होगा। god bholenath macabre dance.

शिवतांडव पर इन अघोरी बाबाओं का नृत्य देखने से पहले हम आपको शिवतांडव से होने वाले कुछ लाभ के बारें में बता देतें हैं।

शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को धन सम्पति के साथ-साथ उत्कृष्ट व्यक्तित्व की भी प्राप्ति होती है। जीवन में किसी भी सिद्धि की महत्वकांक्षा को इस स्तोत्र के जाप से आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से वाणी सिद्धि की भी प्राप्ति होती है। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ नृत्य, चित्रकला, लेखन, योग, ध्यान, समाधी से जुड़े लोगों को निश्चित लाभप्रद होता है। इसके अलावा, कालसर्प से पीड़ित लोगों को इस स्तोत्र के पाठ से मुक्ति भी मिलती है।

शिव ताण्डव का पहला स्तोत्र इस प्रकार है –

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेवलम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।

डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवो शिवम्‌ ॥1॥

भगवान शिव दो तरह से तांडव नृत्य करते हैं। पहला जब वो गुस्सा होते हैं, तब बिना डमरू के तांडव नृत्य करते हैं। लेकिन दूसरे तांडव नृत्य करते समय जब, वे डमरू भी बजाते हैं तो प्रकृति में आनंद की बारिश होती थी।

देखें – भगवान शिव के स्तोत्र पर इन आधोरी बाबओं का तांडव नृत्य  

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