एक अहंकारी राजा और उसके मंत्री की प्रेरणादायक कहानी जीवन में किसी भी चीज को लेकर अहंकार ना करें, क्योंकि अहंकारी व्यक्ति का कोई भी मान-सम्मान नहीं करता है

गौतम बुद्ध एक बार कहीं जा रहे थे लेकिन वो अपना रास्ता भटक गए और गलती से एक राज्य में जा पहुंचे। गौतम बुद्ध को जैसे ही राज्य के लोगों ने देखा वो सब खुश हो गए और गौतम बुद्ध के पास जाकर उनसे आर्शीवाद लेने लगे। राज्य के लोगों ने गौतम बुद्ध को एक दिन के लिए अपने राज्य में रोक लिया और हर कोई उनकी सेवा करने लग गया। गौतम बुद्ध के राज्य में होने की खबर धीरे-धीरे हर किसी के पास पहुंच गई और हर कोई गौतम बुद्ध के दर्शन करने के लिए उनके पास पहुंच गया।

कुछ समय बाद इस राज्य के राजा को उनके एक मंत्री ने गौतम बुद्ध के राज्य में होने की जानकारी दी और इस मंत्री ने राजा से कहा महाराज गौतम बुद्ध गलती से हमारे राज्य में आ गए हैं और हमारे राज्य की जनता ने उन्हें एक दिन के लिए यहां रोक लिया है। हर कोई सच्चे मन से गौतम बुद्ध की सेवा करने में लगा हुआ है। हमें भी जाकर एक बार गौतम बुद्ध से मिला चाहिए ना जाने कब हमें दोबारा जीवन में गौतम बुद्ध के दर्शन हो सके।

गौतम बुद्ध की सेवा करने की बात सुनकर राजा को अपने मंत्री पर गुस्सा आ गया और राजा ने गुस्से में आकर अपने मंत्री से कहा मैं इस राज्य का राजा हूं और तुम ये चाहते हो की में गौतम बुद्ध जैसे भिक्षु से मिलने के लिए जाऊं और राज्य की जनता के साथ मिलकर उस भिक्षु की सेवा करूं। ये बात कहने की तुम्हारी हिम्मत भी कैसे हुई? क्या तुम नहीं जानते हो कि मैं कितना अमीर हूं?

राजा की ये बात सुनने के बाद मंत्री ने उसने कहा महाराज मुझे आप क्षमा करें, मैं आपके लिए काम नहीं कर सकता हूं और मैं अपना ये मंत्री पद छोड़ रहा हूं। मंत्री की ये बात सुनने के बाद राजा ने मंत्री से कहा तुम्हें पता भी है तुम क्या बोल रहे हो ? मंत्री ने राजा कहा मुझे माफ करें मगर मैं आप जैसे छोटे इंसान के लिए काम नहीं कर सकता हूं। क्योंकि जिसे आप भिक्षु कहे रहे हैं वो भी एक समय पर राजा हुआ करते थे और उन्होंने अपने राज्य को त्याग कर भिक्षु बनें का निर्णय लिया था। उन जैसा अमीर व्यक्ति कोई भी नहीं हो सकता है। आप बेशक ही इस समय राजा हो लेकिन आपके अंदर अहंकार पैदा हो गया है और मैं एक अहंकार के साथ काम नहीं कर सकता हूं। अगर मैं एक दिन भी गौतम बुद्ध की सेवा कर लूं तो मैं धन्य हो जाऊंगा। अपने मंत्री की ये बात सुनकर राजा समझ गया की गौतम बुद्ध कोई साधारण इंसान नहीं हैं। राजा ने अपने मंत्री से क्षमा मांगी और अपने मंत्र के साथ जाकर गौतम बुद्ध की सेवा करने लगे।

कहानी से मिली सीख

इंसान के पास अधिक धन आ जाने पर कई बार वो अहंकारी बन जाता है और अपने अहंकार के चलते वो गलत और सही चीजों की पहचान तक नहीं कर पाता है। इसलिए आप कभी भी किसी चीज को लेकर अहंकार ना करें। क्योंकि अहंकारी व्यक्ति का कोई मान-सम्मान नहीं करता है।