महान कवि कालिदास की जीवनी, जानिए कालिदास के जीवन से जुड़ी खास बातें भारत के अलावा दुनिया भर में भी काफी प्रसिद्ध थे कवि कालिदास

महान कवि कालिदास की जीवनी : कालिदास एक महान कवि हैं जिन्होंने कई अद्भुत कविताएं और नाटक लिख रखें हैं। महान कवि कालिदास द्वारा लिखी गई रचनाएँ भारत के अलावा दुनिया भर में भी काफी प्रसिद्ध हैं। कालिदास, राजा विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक रत्न भी हुआ करते थे और इन्हें विक्रमादित्य के दरबार के मुख्य कवि का दर्जा हासिल था। कालिदास ने अपने जीवन में कई सारी कविताएं और नाटकों को लिख रखा है। इनके द्वारा लिखे गए अधिकतर नाटक और कविताएं मुख्य रूप से वेदों, महाभारत और पुराणों पर आधारित होती थी। कालिसदास के जीवन के बारे में ज्यादा अधिक जानकारी मौजूद नहीं है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने अपने नाटकों और रचनाओं को चौथी-पांचवीं शताब्दी ई.पू के दौरान लिखा था।आइये जानते है महान कवि कालिदास की जीवनी-

महान कवि कालिदास

महान कवी कालिदास की जीवनी (Kalidas Biography in Hindi)

पूरा नाम – कालिदास
जन्म तारीख – पहली से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच
पत्नी का नाम – राजकुमारी विद्योत्तमा
पेशा – संस्कृत कवि, नाटककार और विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में एक थे
उपाधि – महाकवि
नाटक और रचनाएं – अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमोवशीर्यम् मालविकाग्निमित्रम्, उत्तर कालामृतम्, श्रुतबोधम्, श्रृंगार तिलकम्, श्रृंगार रसाशतम्, सेतुकाव्यम्, कर्पूरमंजरी, पुष्पबाण विलासम्, श्यामा दंडकम्, ज्योतिर्विद्याभरणम् आदि.

कालिदास का जन्म और परिवार के बारे में जानकारी

महान कवि कालिदास का जन्म कब हुआ था और भारत के किस हिस्से में हुआ था इसके बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि हमारे देश के इस महान कवि का जन्म प्रथम से तीसरी शताब्दी ई.स पूर्व के दौरान हुआ था। जबकि इनके जन्म स्थान को कई विद्वान ने उज्जैन माना है तो कई विद्वानों का कहना है कि इनका जन्म स्थान उत्तराखंड है।

महान कवि कालिदास के माता पिता कौन थे और उनका क्या नाम था इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। इनकी पत्नी का नाम विद्योत्तमा बताया जाता है और कहा जाता है कि कालिदास की पत्नी एक राजकुमारी थी। जब कालिदास की शादी विद्योत्तमा से हुई थी तो विद्योत्तमा को इस बात का ज्ञान नहीं था कि कालिदास अनपढ़ हैं। लेकिन एक दिन जब विद्योत्तमा को कालिदास के अनपढ़ होने के बारे में पता चला तो उन्होंने कालिदास को घर से निकाल दिया और कालिदास को विद्वान बनने पर ही घर वापस आने को कहा। जिसके बाद कालिदास ने विद्या हासिल की और यह एक महान कवि और नाटककार बन गए।

कवि कालिदास द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध रचनाएँ

महान कवि कालिदास (Kalidas) ने कई सारी रचनाएँ लिखी हैं लेकिन इनकी जो सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ हैं वे महाकाव्य – रघुवंश और कुमारसंभव, खंडकाव्य – मेघदूत और ऋतुसंहार, नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्र और विक्रमोर्वशीय है। ऐसा माना जाता है कि जो प्रथम नाटक कालिदास ने लिखा था वह मालविकाग्निमित्रम् था। मालविकाग्निमित्रम् में महान कवि कालिदास ने एक राजा अग्निमित्र की कहानी लिखी है और इस कहानी के अनुसार राजा को अपनी नौकरानी मालविका से प्यार हो जाता है और जब यह बात रानी को पता चलती है, तो वोे मालविका को जेल में बंद करवा देती हैं। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर होता है और अंत में मालविका और राजा अग्निमित्र के प्यार को दुनिया अपना लेती हैं।

महान कवि कालिदास

महान कवि कालिदास द्वारा जो दूसरा नाटक लिखा गया है उसका नाम अभिज्ञान शाकुन्तलम् है। अभिज्ञान शाकुन्तलम् एक प्रेम कहानी पर आधारित नाटक है और इस नाटक में कालिदास ने राजा दुष्यंत और शकुंतला नाम की एक लड़की की प्रेम कहानी का वर्णन किया है। कालिदास द्वारा लिखी गई सभी रचनाओं में से यह नाटक सबसे प्रसिद्ध है और इस नाटक का अनुवाद अंग्रेजी और जर्मन भाषा में भी किया गया है। कालिदास ने अपने जीवन का जो अंतिम नाटक लिखा था वो विक्रमोर्वशीयम् था। यह नाटक राजा पुरूरवा और अप्सरा उर्वशी पर आधारित था।

महान कवि कालिदास के द्धारा लिखी गई अन्य रचनाओं के नाम

  • श्यामा दंडकम्
  • ज्योतिर्विद्याभरणम्
  • श्रुतबोधम्
  • श्रृंगार तिलकम्
  • कर्पूरमंजरी
  • पुष्पबाण विलासम्
  • श्रृंगार रसाशतम्
  • सेतुकाव्यम्

कवि कालिदास से जुड़ी अन्य जानकारी

  • महान कवि कालिदास द्वारा लिखा गया खंडकाव्य मेघदूत काफी प्रसिद्ध है जो एक खंडकाव्य है। मेघदूत में कालिदास ने एक पति और पत्नी के प्रेम का वर्णन किया है।
  • ऐसा कहा जाता है कि कालिदास ने अपने जीवन में कुल 40 रचनाएँ लिखी हैं, जिनमें से उनकी सात रचनाएँ काफी प्रसिद्ध रही हैं।
  • कालिदास के नाम पर कालिदास सम्मान मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाता है। यह सम्मान प्रतिष्ठित कला सम्मानों में से एक है। यह पुरस्कार पहली बार 1980 में दिया गया था। इस सम्मान को शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों को दिया जाता है।

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