नैना देवी के दर्शन करने से दूर हो जाते हैं नेत्र रोग, जानें नैना देवी से जुड़ी कथा उत्तराखंड में स्थित नैना देवी मंदिर में दूर दूर से आतें हैं भक्त, मां का दर्शन कर पाते हैं, इनका आर्शीवाद

नैनादेवी का मंदिर उत्तराखंड में स्थित है और इस मंदिर में हर साल दूर-दूर से लाखों की संख्या में लोग आते हैं और मां के दर्शन करते हैं। ये मंदिर नैना झील के उत्तरी किनारे पर है। ऐसा कहा जाता है कि ये  प्राचीन मंदिर 15 वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था, लेकिन भूस्खलन आने के कारण ये मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गया था। साल 1842 में मोती लाल शाह द्वारा पहली नैना देवी की मूर्ति मंदिर में स्थापित की गई थी। लेकिन साल 1880 में आए एक भूस्खलन के कारण मंदिर पूरी तरह से बर्बाद हो गया था। जिसके बाद स्थानीय लोगों द्वारा 1883 में इस मंदिर को फिर से बनाया गया।

इस मंदिर के अंदर, एक विशाल आंगन है, जिसके बाईं तरफ एक पवित्र पीपल का पेड़ है और दाईं ओर भगवान गणेश और हनुमान जी की मूर्तियाँ स्थापित हैं। वहीं मंदिर के मुख्य गर्भगृह में तीन मूर्तिया हैं जिसमें से एक मूर्ति मां काली की है जो कि बाईं ओर है, दो नेत्रों या आंखों का प्रतिनिधित्व करने वाली मां नैना देवी की मूर्ति बीच में है और दाईं ओर भगवान गणेश जी की मूर्ति है। इस मंदिर से जुड़ी एक आस्था के मुताबिक मात्र इस मंदिर में आने से और मां के दर्शन करने से लोगों को कई तरह के नेत्र रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए जिन लोगों को भी आँखों में कोई तकलीफ है वो इस मंदिर में जरूर जाएं।

कैसे पड़ा मंदिर का नाम नैना देवी

शास्त्रों के अनुसार यहीं वो स्थान है जहां पर सती मां की आंखें गिरी थी। आंखे इस स्थान पर गिरने से इस मंदिर का नाम नैना देवी पड़ गया। इस मंदिर में मां के नैनों की पूजा की जाती है। हर साल इस मंदिर में नंदा अष्टमी के दिन मेले का आयोजन होता है और ये मेला 8 दिनों तक चलता है। इस मेले के अलावा नवरात्र के दौरान भी इस मंदिर में कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और दूर-दूर से लोग नवरात्र के दौरान इस मंदिर में आया करते है।

कहां है स्थित

ये मंदिर उत्तराखंड राज्य की हसीन वादियों में है और ये मंदिर नैनीताल से दो किलोमीटर की दूरी पर है। ये मंदिर सुबह 6 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक खुला रहता है और आप इस मंदिर में इस दौरान कभी भी जा सकती हैं। इस मंदिर के बाहर ही आपको आसानी से पूजा का सामान मिल जाएगा।

कैसे जाएं

उत्तरखंड राज्य में आप सड़क मार्ग के जरिए आसानी से जा सकते हैं। आपको दिल्ली से आसानी से नैनीताल जाने के लिए बसें भी मिल जाएगी। वहीं अगर आप रेल के मार्ग के जरिए इस जगह जाना चाहते हैं तो आप कोठगोदाम स्टेशन तक की ट्रेन पकड़ लें। इसके अलावा आप अपने शहर से किराए पर किसी गाड़ी को करके भी इस जगह जा सकते हैं।

कहा रुकें

नैनीताल काफी फेमस जगह है और आपको यहां पर आसानी से होटल मिल जाएंगे। होटल के अलावा आप चाहें तो धर्मशाल में भी रुक सकते हैं। इस मंदिर के अलावा आप  राजभवन, केव गार्डन, चिड़ियाघर, भीमताल, भुवाली, घोड़ाखाल, रामगढ़ और रानीखेत जैसे कई दर्शनीय जगह पर भी जा सकते है।