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भारत के ‘मिशन शक्ति’ को अमेरिका ने किया कन्फर्म, बताया क्यों भारत ने उठाया ये कदम

अमेरिका ने भारत के ए-सैट परीक्षण का समर्थन किया है और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने 11 अप्रैल को कहा कि भारत अंतरिक्ष में खतरे को लेकर परेशान था इस वजह से उसने ए-सैट परीक्षण करवाया. भारतीय रक्षा अनुसंधान (डीआपजीओ) ने 27 मार्च को एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का टेस्ट किया था और इस दौरान करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर पृथ्वी की नचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को खत्म करने में कामयाबी मिली. भारत यह ताकत हासिल कनरे वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया है. भारत के ‘मिशन शक्ति’ को अमेरिका ने किया कन्फर्म, जानिए इसके बारे में डिटेल.

भारत के ‘मिशन शक्ति’ को अमेरिका ने किया कन्फर्म

भारत की इस बड़ी जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परीक्षण की जानकारी दी. भारत के लिए एक बार फिर गर्व की बात सामने आई है और दुनिया के कई बड़े देशों ने भारत को इस कामयाबी के लिए शुभकामनाएं दी हैं. मगर अमेरिका क 4 पहले बयान कुछ ऐसे रहे हैं.

5 अप्रैल – पेंटागन ने ए-सैट के मलबे को लेकर संभावना जताई है और कहा है कि वायुमंडल में ही जलकर नष्ट हो जाएगा.

3 अप्रैल – नासा ने कहा था कि भारतीय सैटेलाइट के नष्ट होने से 400 टुकड़े हुए. ये अंतरिक्ष की क्लास में चक्कर लगाते रहे हैं और जिसकी वजह से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन और उसमें रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को भी खतरा हुआ.

31 मार्च – पेंटागन ने भारत के मिशन शक्ति की जासूसी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका को टेस्ट की जानकारी पहले से थी. अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट डेविड डब्ल्यू एस्टबर्न ने बताया कि उन्होने किसी भी तरह से भारत की जासूसी नहीं की बल्कि वे भारत के साथ आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं.

29 मार्च – अमेरिकी कार्यवाहर रक्षा मंत्री पैट्रिक शैनहन ने बताया था कि वे भारत के परीक्षण पर रिसर्च कर रहे हं. उन्होने दुनिया के ऐसे किसी भी देश को चेतावनी दी थी जो भारत जैसे एंटी सैटेलाइट परीक्षण पर विचार कर रहा है. शैनहन ने ये भी बताया कि वे अंतरिक्ष में मलबा छोड़कर नहीं आ सकते.

भारत के इस टेस्ट को करने की वजह

1. यूएस स्ट्रैटजिक कमांड के कमांडर जनरल जॉन ई हाइटन के अनुसार, भारत के ए-सैट को लेकर पहली बात जो सामने आई वो ये है कि यह परीक्षण किया ही क्यों गया, इसका जवाब यह है कि अंतरिक्ष में खतरा महसूस हो रहा था.

2. हाइटन ने सीनेट आर्म्ड सर्विस कमेटी से ऐसा भी बताया कि इस खतरे की वजह से भारत ने अंतरिक्ष में खुद को ताकतवर बनाने के बारे में सोचा है. सीनेटरों ने हाइटन से भारत के ए-सैट परीक्षण की जरूरत को लेकर सवाल पूछा गया था.

3. पेंटागन के टॉप कमांडर हाइटन के मुताबिक,”अगर आप मानदंडों की बात करते हैं तो एक जिम्मेदार कमांडर के रूप में मुझे अंतरिक्ष में और ज्यादा मलबा नहीं चाहिए.

4. सीनेटर टिम केन ने भारत के परीक्षण पर चिंता करते हुए बताया, ‘वह कह रहे हैं कि लो ऑर्बिट में एक सैटेलाइट खत्म किया गया और उपग्रह के 400 टुकड़े हो गए. इनमें से 24 टुकड़े इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के लिए खतरा है. साल 2007 में चीन के भी इसी तरह के परीक्षण से सैटेलाइट के टुकड़े हो गए थे और इन टुकड़ों से आज भी खतरा बना हुआ है.

पेंटागन और नासा के बयानों में ऐसे थे विरोध

1. भारत के मिशन शक्ति को लेकर पेंटागन और नासा के बयानों में विरोधाभास भी सामने आया है जिसमें नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन अंतरिक्ष में ए-सैट के 400 टुकड़े होने की बात बताई और टुकड़ों से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर खतरा बताया गया. वहीं दूसरी ओर कार्यवाहक रक्षा मंत्री शैनहन ने कहा था कि मलबा वायुमंडल में प्रवेश करते ही पूरी तरह से जल जाएगा.

2. भारत के शीर्ष वैज्ञानिक ने बताया था कि ए-सैट का मलबा 45 दिन में खत्म हो जाएगा. वहीं अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता गैरेट मार्क्विस के अनुसार, हम भारतीय ए-सैट के मलबे पर लगातार नजर रखे हुए हैं जिससे मानव अंतरिक्ष यान और आईएसएस की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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