अध्यात्म

जान लीजिये वास्तु शास्त्र में क्यों ईशान कोण को दिया जाता है इतना महत्व

Ishan Kon : वास्तुशास्त्र का हमारे जीवन में एक बहुत ही अभिन्न रोल है और अक्सर ही ऐसा देखा गया है की वास्तु में जरा सी भी गड़बड़ी हमारे कई सारे बने बनाए काम बिगाड़ देती है। वैसे तो वास्तु में कई सारे नियम आदि बताए गए हैं जो घर बनाते समय और इसके अलावा और भी कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लागू होते हैं मगर इन सब मे आपने और बहुत सारे लोगों ने वास्तु से संबन्धित शब्द “ईशान कोण” के बारे में काफी ज्यादा बार सुना होगा। क्या है यह ईशान कोण (Ishan kon) और क्यों है यह इतना ज्यादा महत्वपूर्ण आज हम आपको इससे जुड़ी कई सारी बातें बताएँगे साथ ही यह भी बताएँगे की घर में यह कोण किसे कहते हैं और यह किस दिशा में होता है और इसके क्या लाभ आदि हैं।

ईशान कोण का महत्व

Ishan kon

सर्वप्रथम तो आपको बताते चलें की वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ही ईशान कोण (Ishan kon) कहते हैं। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें की वास्तुशास्त्र में इस स्थान को सबसे पवित्र माना गया है। यह उत्तर और पूर्व दिशा का मिलन बिंदु है। वास्तुशास्त्र के मुताबिक़ यह कोण पर देवी-देवताओं और आध्यात्मिक शक्तियों का वास रहता है। कहा जाता है की किसी घर में यह कोण को सबसे पवित्र कोना माना जाता है और यही वजह है की इस दिशा में रसोई घर, शौचालय या कूड़ा-कचरा घर जैसे निर्माण पूरी तरह वर्जित माना जाता है। आपको यह भी बता दें की ईशान भगवान शिव का भी एक नाम है और भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है।

ईशान कोण

मान्यता है की इन दोनों दिशाओं के मिलने वाले कोण पर उत्तर-पूर्व क्षेत्र बनता है इसी वजह से यह घर या प्लाट का यह सबसे शुभ तथा ऊर्जा के स्रोत का शक्तिशाली कोना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ईशान कोण (Ishan kon) पर दैवीय शक्तियां इसलिए भी बढ़ती हैं क्योंकि इस क्षेत्र में देवताओं के गुरु बृहस्पति और मोक्ष कारक केतु का भी वास रहता है। इसके अलावा आपको बता दें की पूर्व दिशा के प्रतिनिधि सूर्य और स्वामी इंद्र माने गए हैं और ईस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता की सम्पूर्ण सृष्टि में प्राणियों एवं वनस्पतियों की उत्प त्ति एवं पोषण सूर्य के द्वारा ही होता है। इसलिए घर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर होना अत्यंत शुभ माना गया है। आपकी जानकारी के लिए यह भी बताते चलें की जिस भी घर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर हो या पूर्व की ओर बड़ी-बड़ी खिड़कियां हों, तो ज्योतिष शास्त्र और वास्तुशास्त्र ले अनुसार बताया जाता है की उस घर में निवास करने वाले व्यक्तियों को अच्छे स्वास्थ्य के साथ पराक्रम, तेजस्विता, सुख-समृद्धि, बुद्धि-विवेक, धन-धन्य, भाग्य एवं गौरवपूर्ण जीवन की प्राप्ति होती है।

ईशान कोण (Ishan Kon) पर ना हो इन चीजों का निर्माण

ईशान कोण

जब भी कभी आप घर का निर्माण करा रहे हों तो इस बात का विशेष ध्यान रखें की कभी भी ईशान कोण (Ishan Kon) पर बाथरूम, सेप्टिक टैंक्स, पानी की टंकी, सीढ़ियां, स्टोर, रसोई आदि का निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि जिस घर में ऐसा होता है बताया जाता है की वहाँ पर मानसिक परेशानी बढ़ती है तथा मस्तिष्क से सम्बंधित रोग होते हैं। इनसे आपकी निर्णय लेने की क्षमता में रुकावट आती है तथा नकारात्मक सोच का निर्माण होता है। गृहणी के लिए तो यह ख़ास तौर से बहुत कष्टप्रद होता है। यहां की दीवारों पर लाल, गहरा लाल, गुलाबी तथा बैंगनी रंगो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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