केरल, प. बंगाल में भाजपा/संघ सदस्यों पर हमले – ये राजनैतिक पार्टियां हैं या आतंकी संगठन ?

 

सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी कही जाने वाली भाजपा ने पहले तो दक्षिण भारत में कर्नाटक में सरकार बनाकर अन्य सभी पार्टियों को चौंकाया, फिर लोकसभा चुनाव में भी असम, कर्नाटक में शानदार प्रदर्शन एवं प. बंगाल में सीट तथा केरल तमिलनाडु एवं नार्थ ईस्ट के कई राज्यों में अनदेखी ना की जाने वाले संख्या में वोट, फिर जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्, हरयाणा, झारखण्ड जैसे राज्यों में सरकार बनायीं और अब असम में अपनी दम पर इतने बड़े जनाधार से सरकार बनाई तथा प. बंगाल और केरल में अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराई और तमिलनाडु में सीट भले न हों लेकिन वोट मिलने शुरू हो गए हैं | मतलब यह कहना गलत नहीं होगा कि अब भाजपा भारत के हर हिस्से में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा रही है |
भाजपा की इस बढ़ती उपस्थिति से कांग्रेस एवं क्षेत्रीय पार्टियों की नींद उड़ना स्वाभाविक है क्योंकि अब उनको उन राज्यों में भी भाजपा से लड़ना पड़ेगा जहां कि कुछ समय पहले तक भाजपा का कोई वजूद नहीं था | कुछ पार्टियों ने राजनैतिक हमले करके भाजपा से लड़ने की कोशिश की तो कुछ ने अब जानलेवा हमले करने शुरू कर दिए हैं | दिन रात गांधी जी का नाम लेकर अहिंसा का नाटक करने वाली पार्टिया सच्चाई में तो अब आतंवादी संगठनों की तरह दिखाई दे रहीं हैं | सिर्फ हमारा राज चले, लोग हमारी सही-गलत सब बात मानें और चुप रहें, जो विरोध में खड़ा हो उसे या तो जान से मार दो या फिर जानलेवा हमला कर के डराने की कोशिश करो – यही तो आतंकवाद है | अल कायदा, आई एस, बोको हराम आदि यही तो करते हैं | फिर क्या फर्क है इन राजनैतिक दलों एवं इन आतंकी संगठनों में ?
यदि ये पार्टियां खुद को राजनैतिक संगठन कहती हैं तो राजनैतिक तरीकों से पार्टी चलायें और अपने अच्छे कामों से विरोधियों का मुंह बंद कराएं | जानलेवा हमलों से क्या साबित करना चाहते हैं ? खैर अति हर चीज की बुरी होती है | यदि ये पार्टियां नहीं सुधरी तो कोई बड़ी बात नहीं होगी यदि अगले चुनावों में वहां भाजपा की सरकारें देखने मिलें |

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