14 मार्च से शुरू है होलाष्टक, इन दिनों भूलकर भी न करें कोई शुभ काम होलाष्टक के आठ दिन होते हैं बेहद ही अशुभ ना करें कोई भी शुभ कार्य, नहीं मिलेगी सफलता

होली एक पवित्र पर्व है और इस पर्व को धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है। ये त्योहार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा में आता है। हालांकि पूर्णिमा तिथि के आठ दिन पहले ही होलाष्टक शुरू हो जाता है और इस दौरान शुभ कार्य बिल्कुल नहीं किए जाते हैं । क्योंकि होलाष्टक के समय किए गए किसी भी कार्य को करने पर सफलता नहीं मिलती है और हमारे शास्त्रों में होलाष्टक के 8 दिनों को साल के सबसे अशुभ दिन माने जाते हैं। पंडितों के अनुसार इन 8 दिनों के दौरान ग्रहों के स्थानों में परिवर्तन होता है और इस परिवर्तन के चलते होलाष्टक के दौरान  शुभ कार्य नहीं किए जाते है। इस साल होलाष्टक 14 मार्च से शुरू हो रही है जो कि  21 मार्च तक रहेंगे।

आखिर क्यों होलाष्टक के समय नहीं करना चाहिए शुभ काम

होलाष्टक के समय शुभ कार्य ना करने से कई सारी कथाएं जुड़ी हुई हैं और इन कथाओं के अनुसार इस दौरान जो कार्य किए जाते हैं वो केवल अशुभ परिणाम ही देते हैं। इसलिए आप किसी भी तरह शुभ कार्य होलाष्टक के दौरान ना करें।

शिवजी से जुड़ी कथा

कहा जाता है कि एक बार शिव जी कड़ी तपस्या कर रहे थे और इस तपस्या को भंग करने के लिए  कामदेव ने खूब कोशिश की और वो अपनी कोशिश में सफल भी हो गए। शिव जी की तपस्या भंग हो गई और अपनी तपस्या भंग होने से शिव जी को गुस्सा आ गया और उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि शिव जी ने कामदेव को होलाष्टक के पहले दिन ही भस्म किया था।

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद से जुड़ी कथा

हिरण्यकश्यप नाम का एक दैत्य हुआ करता था जो कि नास्तिक था लेकिन उसका बेटा प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। प्रह्लाद के पिता को ये बात  पसंद नहीं थी की उसका बेटा विष्णु का भक्त है और इसके चलते हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को आठ दिनों तक कष्टों में रखा। इन आठ दिनों को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है. वहीं होली से एक दिन पहले होलिका अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी। दरअसल होलिका को ना जलने का वरदान मिला था जिसके चलते होलिका प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई थी। मगर वो खुद जल गई है और प्रह्लाद का कुछ भी नहीं हुए।.

होलाष्टक के दौरान ना करें ये शुभ कार्य-

ना करें शादी

होलाष्टक के समय कभी भी शादी नहीं करना चाहिए। अगर इस दौरान कोई शादी करता है तो उसकी शादी असफल रहती है। इसलिए आप  होलाष्टक के दौरान शादी करने से बचें। इसी तरह से लड़का और लड़की को होलाष्टक के समय सगाई भी नहीं करनी चाहिए।

गृह प्रवेश

अगर आप गृह प्रवेश करने का सोच रहे हैं तो होलाष्टक के दौरान ऐसा ना करें। क्योंकि इस दौरान गृह प्रवेश करने से आपके घर में कभी भी शांति नहीं आती है। इसी तरह से आप अपने बच्चों का मुंडन और गदोदभराई जैसी शुभ कार्य भी इन आठ दिनों के दौरान करने से बचें। क्योंकि अगर आप  होलाष्टक के दौरान ये शुभ कार्य करते हैं तो आपको इनका अशुभ परिणाम ही मिलेगा।

ऊपर बताए गए शुभ कार्यों के अलावा आप होलाष्टक के दौरान किसी भी तरह की विशेष पूजा, नया व्यवसाय, बच्चे का नामकरण जैसे शुभ कार्य भी नहीं करने चाहिए।