इस अखाड़े के साधु हैं काफी पढ़ें लिखें, पास है IIT, eng की डिग्री, देते हैं कॉलेजों में लेक्चर

कुंभ के मेले में हर बार 13 अखाड़ों द्वारा हिस्सा लिया जाता है मगर इस बार यानी साल 2019 के कुंभ में इन अखाड़ों की संख्या 14 हो गई है.  वहीं कुंभ में हिस्सा लेने वाले इन 14 अखाड़ों में से 7 अखाड़ों की नींव खुद शंकराचार्य द्वारा रखी गई है. कुंभ के मेले में शिरकत करने आए ये सभी अखाड़े हर बार चर्चा का विषय रहते हैं और इस बार भी इन अखाड़ों का खूब जिक्र हर जगह किया जा रहा है. इन सभी अखाड़ों की अपनी अपनी विशेषताएं होती हैं. और हर अखाड़ों में कई सारे संत होते हैं और ये सभी अखाड़े पूरे कुंभ के दौरान मेले में ही उपस्थित रहते हैं.

काफी पढ़े लिखे हुए हैं ये संत

अगर आप सोच रहें हैं कि इन अखाड़ों के साधु संत आम बाबाओं की तरह ही हैं तो आप एकदम गलत हैं क्योंकि इन अखाड़ों से जुड़े अधिकतर सभी संत काफी पढ़ें लिखे हुए हैं और उनके पास कई विषयों में डिग्री भी है. वहीं इन सभी 14 अखाड़ों में से निरंजनी अखाड़ा पढ़े लिखे संतों के मामले में सबसे आगे हैं और इस अखाड़े से कई पढ़े लिखे लोग जुड़े हुए हैं जो कि अब साधु बन गए हैं. इस अखाड़े से जुड़े हुए कई संत तो प्रोफेसर तक रहे चुके हैं. 904 में स्थापित हुए इस अखाड़ा में इस वक्त 10 हजार से ज्यादा नागा संन्यासी हैं और इस अखाड़े में 33 साधुओं को महामंडलेश्वरों की उपाधि दी गई है.

कुंभ में शामिल होने वाले सभी अखाड़ों में से सबसे बड़े अखाड़े का दर्जा जूना अखाड़ा के पास है और इसके बाद निरंजनी और महानिर्वाणी का नंबर आता है. निरंजनी अखाड़े में मौजूद साधु-संत काफी विद्वान हैं और साथ में ही इस अखाड़े द्वारा कई सारे स्कूल भी चलाए जा रहे हैं.  कहा जाता है की इस अखाड़े में जितने भी साधु-संत हैं उनमें से 70 प्रतिशत ने उच्च शिक्षा हासिल कर रखी है. इतना ही नहीं इस अखाड़े के साधु-संत के पास वकालत, डॉक्टर, इंजीनियरिंग, संस्कृत से जुड़ी हुई डिग्री है.

निरंजनी अखाड़े  से नाता रखने वाले महेशानंद गिरि जी के मुताबिक उनके पास ज्योग्राफी की डिग्री है और वो इस विषय के प्रोफेसर थे. जबकि इसी अखाड़े के साधु बालकानंद जी ने डॉक्टर की पढ़ाई कर रखी है. वहीं पूर्णानंद गिरि साधु लॉ विषय में एक्सपर्ट हैं और इस विषय के अलावा इनको संस्कृत का भी खूब ज्ञान है.

देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी नेट की परीक्षा को पास करने वाले  संत स्वामी आनंदगिरि भी आज एक साधु बन गए हैं और वो अपनी सेवाएं इस अखाड़े को दे रहे हैं. इतना ही नहीं अखाड़े से जुड़ने से पहले इन्होंने आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम शिलांग जैसे प्रसिद्ध कॉलेज के छात्रों को लेक्चर भी दिया हुए. हालांकि आज भी ये कई कॉलेज में जाकर लेक्चर दिया करते हैं और  इस वक्त भी इन्होंने पढ़ाई से नाता नहीं छोड़ा है और ये  पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं. आनंदगिरि संत की तरह ही आशुतोष पुरी नाम के संत ने नेट की परीक्षा पास की हुआ है और इनके पास पीएचडी की डिग्री भी है.

निरंजनी अखाड़े की और से इस वक्त इलाहाबाद और हरिद्वार में स्कूल और कॉलेज भी चलाए जा रहे हैं और इस अखाड़े के अनुसार ये इन जगहों पर पांच स्कूल-कॉलेजों को चला  रहा है. इन स्कूल और कॉलेज में इस अखाड़े से जुड़े संत द्वारा ही छात्राओं को शिक्षा दी जा रही है.

हर अखाड़े के साथ महामंडलेश्वर जुड़े हुए होते हैं और महामंडलेश्वर की उपाधि पाना काफी मुश्किल होता है. वहीं कुंभ में शामिल हुए सभी अखाड़ों के लगभग आधे से ज्यादा यानी 100 के करीब महामंडलेश्वरों के पास उच्च शिक्षा है.