मायावती ने कांग्रेस के न्यूनतम आय के वादे पर याद दिलाया इंदिरा का गरीबी हटाओ का नारा

कांग्रेस पार्टी के द्वारा न्यूनतम आय के वादे पर मायावती ने तंज कसते हुए कहा है कि इंदिरा के गरीबी हटाओ नारे का क्या हुआ? मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों का रिकॉर्ड और खासकर इंदिरा गांधी की सरकार के बहुचर्चित गरीबी हटाओ के नारे और घोषणा के परिणाम जनता के सामने मौजूद है कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों द्वारा किसानों की दुर्दशा को दूर करने का वादा किया था परंतु यह सब हवा फैलाई गई थी।

दरअसल, मंगलवार के दिन बसपा सुप्रीमो मायावती ने यह कहा है कि भरोसे लायक मामले में देखा जाए तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारों का रिकॉर्ड ठीक नहीं है लखनऊ के एक बयान में मायावती ने कहा था कि इन दोनों सरकारों का रिकॉर्ड ठीक नहीं रहा है जिससे देश की जनता इन पर सरलता से भरोसा कर पाए मायावती ने कहा कि चुनावी वादे और घोषणा पत्र पर तो लोगों को बिल्कुल भी विश्वास नहीं है इस संबंध में अगर कुछ निर्णय लागू किए गए तो वह सिर्फ दिखावा ही रहेगा जो सभी जानते हैं कांग्रेस पार्टी ने भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जनता को बहुत ही लुभावने वादे किए हैं कांग्रेस पार्टी ने यह वादा किया है कि अगर उनकी सत्ता की सरकार आई तो गरीबी और भुखमरी को समाप्त करने के लिए न्यूनतम आय की गारंटी दी जाएगी।

आपको बता दें कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में वादा किया था कि अगर 2019 में कांग्रेसी की सरकार बनी तो देश के हर एक गरीब को न्यूनतम आय की गारंटी दी जाएगी राहुल गांधी के इसी वादे पर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सवाल खड़ा कर दिया है, मायावती ने कांग्रेस को पूर्व की इंदिरा गांधी सरकार की याद दिलाते हुए कहा है कि इंदिरा गांधी का गरीबी हटाओ वाले नारे का क्या हुआ था? मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों का रिकॉर्ड और खासकर इंदिरा गांधी की सरकार के बहुचर्चित गरीबी हटाओ के नारे और घोषणा के परिणाम जनता के समक्ष है।

मायावती ने कहा कि इस घोषणा से पूरा देश आश्चर्यचकित हुआ है कहीं उनके साथ उसी प्रकार का मजाक तो नहीं किया जा रहा जिस प्रकार पिछली सरकार ने किया था मायावती ने पार्टियों द्वारा किसानों की दुर्दशा को दूर करने को लेकर किया गए वादे को छलावा बताया है इतना ही नहीं मायावती ने कहा है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही असफल रहे हैं उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि यह दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं गरीबों मजदूरों किसान और बेरोजगारों से इस तरह का कोई भी वादा नहीं करना चाहिए ऐसा करके वह धोखा दे रहे हैं।