कलयुग को लेकर भगवान श्री कृष्ण ने 5000 वर्ष पहले ही कर दी थी ये चौंका देने वाली भविष्यवाणियां

शास्त्रों के अनुसार दुनिया में कुल चार युग थे जिनमे से सतयुग को सबसे उत्तम युग माना गया था. यह युग सच्चाई का प्रतीक था. लेकिन समय बीता और धीरे धीरे धरती पर कलयुग ने अपना घर बना लिया. कलयुग को सबसे नीच युग माना गया है. कलयुग के बारे में भगवान श्री कृष्ण ने वर्षों पहले ही अपनी भविष्यवाणियां कर दी थी. श्रीमद् भगवत गीता में लिखित अनुसार जब अर्जुन अपने रक्त संबंधियों को मारने के इए विचलित थे तो उनके सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो गया था उस समय श्री कृष्ण भगवान ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें सही राह दिखाई थी. भगवत गीता में श्री कृष्ण ने कलयुग के समय को लेकर जो बातें कहीं थी, वह कहीं ना कहीं आज सच होती नजर आ रही हैं.

हालाँकि यह भविष्यवाणियाँ आज से 5 हज़ार वर्षों पूर्व की गई थी लेकिन अब यह सभी बातें मनुष्यों पर बिलकुल सटीक बैठती हैं. इसमें धरती के अंत को लेकर ऐसी कईं बातें मौजूद हैं, जो शायद जल्दी ही सच हो जाएंगी. चलिए जानते हैं श्रीकृष्ण जी द्वारा बताये गए धरती के अंत के रहस्यों के बारे में-

  • श्रीमद् भगवत गीता के 12.2.1: के अनुसार कलयुग महा पापी समय है. इस समय के दौरान धर्म, सच्चाई, अच्छाई, स्वच्छता, दया भावना, शारीरिक बल और यादाश्त आदि जैसी चीज़ें धीरे धीरे घटती चली जाएंगी.
  • श्रीमद् भागवतम 12.2.2 के अनुसार मनुष्य इस समय में काफी लालची हो जाएगा और अपने लालच के आधार पर ही रिश्तों का मुल्यांकन करेगा. कानून और न्याय जैसी चीज़ें केवल उन्ही लोगों का साथ देंगी, जो अतियंत धनवान होंगे.

  • श्रीमद् भागवतम 12.2.3 में लिखे अनुसार कलयुग के इस समय में स्त्रियाँ केवल उनकी का साथ देंगी, जो उनके बाहरी आकर्षण को सराहेंगे. इस समय में लोग अपनों को धोखा देंगे और बेईमानी से जीएन शुरू कर देंगे, बिजनेस और व्यपार का मूल धोखा और लालच बन कर रह जाएगा. औरतों को केवल शारीरक जरूरतों की पूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

  • श्रीमद् भागवतम 12.2.4 के अनुसार लोग अधियात्मिक चीज़ों से दूरी बना लेंगे और बहरी प्रतीकों से ही व्यक्ति की आध्यात्मिकता सुनिश्चित की जाएगी. जो लोग शब्दों का इस्तेमाल करना जानते हैं, जीत केवल उन्हें ही मिलेगी. ऐसे लोगों को ही कलयुग का विद्वान समझा जाएगा.
  • श्री कृष्ण के अनुसार कलयुग के इस समय में एक जलाशय को पवित्र स्थान की मान्यता दे दी जाएगी. हर व्यक्ति के जीव का लक्ष्य उसका पेट पालना रह जाएगा. जो व्यक्ति अपना और परिवार का पालन-पोषण कर सकेगा, केवल उसी को प्रतिष्ठित व्यक्ति समझा जाएगा. पैसों और अहुदे को अहमियत दी जाएगी.
  • यदि कोई व्यक्ति धनवान नहीं है तो उसे नीच समझ कर उसका तिरस्कार किया जाएगा. बनावटीपन को ही लोगों का मुख्य गुण माना जाएगा. समझौता ही शादी के रिश्ते का प्रतीक बन जाएगा. भ्रष्टाचारियों की भीड़ से धरती भर जाएगी ऐसे में जो ताकतवर होगा, उसी को राजनीति की सत्ता सौंप दी जाएगी.
  • लोगों की आमदनी कम और खर्चें अधिक हो जाएंगे ऐसे में लोग क़र्ज़ में डूबते चले जाएंगे और घास, पत्तियां, फल और मांस खाना शुरू कर देंगे. कईं जगहों पर सूखे से आदमी का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगा.