यश चोपड़ा, एक ऐसा निर्देशक जिसने शाहरुख खान को बना दिया सुपरस्टार

न्यूजट्रैंड बॉलीवुड डेस्कः  आज आप भले ही पर्दे पर शाहरुख खान को रोमांस किंग कहते हों, लेकिन उन्हें रोमांस का पाठ पढ़ाया था निर्देशक यथ चोपड़ा ने जो असल मायने में रोमांस के बादशाह थे। पर्दे पर जैसा  प्यार यश चोपड़ा ने दिखाया वैसी ही चाहत लोग असल जिंदगी में करने लगे। रोमांस सिखाने वाले निर्देशक यश जब अचानक से दुनिया छोड़ गए तो बॉलीवुड को एक गहरा धक्का लग गया।21 अक्टूबर को उनकी डेश एनिवर्सिरी के मौके पर बताते हैं उनकी जिंदगी और पर्दे से जुड़े कुछ किस्से।

यश चोपड़ा रोमांस किंग

यश चोपड़ा का जन्म लाहौर में 27 सितंबर को हुआ था। उनके बड़े भाई का नाम बी आर चोपड़ा था जो इंडस्ट्री के मशहूर प्रोड्यूसर थे। जब उन्होंने कैमरे संभालने का काम अपने हाथों में लिया तो बड़े भाई के साथ ही उन्होंने फिल्में बनानी शुरु की। उनकी को डायरेक्ट की हुई फिल्में थीं नया दौर, एक ही रास्ता और साधना। जब वो निर्देशक की कुर्सी पर बैठे तो 1959 में पहली फिल्म बनाई धूल का फूल।

( दिल तो पागल है शूटिंग के दौरान यश चोपड़ा, शाहरुख खान और माधुरी)

यथ चोपड़ा ने इतने सारे कलाकारों को रोमांस करना सिखाया कि वह स्टार्स सुपरस्टार बन गए। उनमें सबसे बड़ा नाम आता है शाहरुख खान का। किंग खान भले ही लोगों को रोमांस के टिप्स देते हों, लेकिन रोमांस करना कैसे है यह लोगों को सिखाया यश चोपड़ा ने।शाहरुख को सुपरस्टार बनाने में यश चोपड़ा का बड़ा हाथ था।

यश चोपड़ा का डर

शाहरुख और यश की दोस्ती हुई फिल्म डर से। जी हां वो ही फिल्म जिसमें शाहरुख ने साइको लवर का किरदार निभाया था।कककककक…किरन कहने वाले शाहरुख ने पर्दे पर ऐसा प्यार दिखाया कि लोगों को शाहरुख से डर भी लगा और उनके किरदार से लोगों को प्यार भी हो गया।

हालांकि बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे की शाहरुख यश चोपड़ा की पहली पसंद नहीं थे। सबसे पहले राहुल का किरदार अजय देवगन को दिया गया था, लेकिन डेट ना मिलने के कारण अजय ने इस फिल्म को ठुकरा दिया। इसके बाद यह ऑफर आमिर खान के पास गया, लेकिन वह उस वक्त निगेटिव किरदार नहीं करना चाहते थे। उन्होंने यह फिल्म ठुकरा दी।

यश को मजबूरन शाहरुख को साइन करना पड़ा। उन्होंने शाहरुख की फिल्म किंग अंकल देखी थी, लेकिन डर के रोल के लिए उन्हें शाहरुख सही नहीं लग रहे थे। शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर थी। जब फिल्म बनी तो लीड किरदार में सनी के होने के बावजूद लोगों ने शाहरुख को नोटिस किया।

इस एक फिल्म से शाहरुख ने भी साबित कर दिया की वो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों किरदार जबरदस्त तरीके से निभा सकते हैं। इसके बाद शाहरुख और यश चोपड़ा की जोड़ी बन गई और दोनों ने कई ब्लॉकबस्टर फिल्म एक साथ दी जिसमें  वीर जारा, डर, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है, , जब तक है जान जैसी फिल्में शामिल हैं।

यश चोपड़ा ने जीते अवॉर्ड

इनमे से धर्मपुत्र, चांदनी, डर, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, दिल तो पागल है और वीर जारा के लिए यश ने नेशनल अवॉर्ड भी जीता था।1969 में यश चोपड़ा ने फिल्म इत्तेफाक बनाई थी जिसमे ना कोई गाना था और ना ही इंटरवल। यश चोपड़ा ने एक से बढ़कर एक फिल्में बनाई थी और उन्होंने 11 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था। 2001 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार से नवाजा गया था।

जब तक है जान यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म बनी और डेंगू की बीमारी से यश इस दुनिया से चल गए। अपनी आखिरी फिल्म में भी उन्होंने शाहरुख को ही कॉस्ट किया था और पहली बार कैटरीना भी यश चोपड़ा की हीरोइन बनीं थीं।  यश चोपड़ा को हिंदी सिनेमा में दिए गए उनके योगदान के लिए याद किया जाता रहेगा।